General knowledge, gk,vitamin c, vitamin A, all vitamin benefits,current affair, hindigk Corona virus, covid19 important question gk, current affairs hindi gk hindi current affairs
Saturday, 28 November 2020
विटामिन ए के लाभ , Benefits of vitamin a in hindi
शरीर के लिए जरूरी विटामिन,Body essential vitamins (vitamin B) in hindi
Friday, 27 November 2020
कैल्शियम (Calcium)
हडि्डयों और दांतों को बनाने और उनके रख-रखाव के लिए, पेशियों के सामान्य संकुचन के लिए, हृदय की गति को नियमन करने के लिए और रक्त का थक्का बनाने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम जीवन-शक्ति और सहनशीलता बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल स्तरों को संतुलित करता है, स्नायुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और रजोधर्म विषयक दर्दों के लिए ठीक है। एन्जाइम की गतिविधि के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है। हृदय-संवहनी के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम मैग्नेशियम के साथ काम करता है। रक्त के जमाव के द्वारा यह घावों को शीघ्र भरता है। कुछ विशेष कैंसर के विरुद्ध भी यह सहायक होता है। कैल्शियम उदासी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और एलर्जी को कम करता है।
कैल्शियम की आवश्यकता गर्भवती महिलाओं, 60 से अधिक उम्र के पुरुषों, 45 से अधिक उम्र की स्त्रियों, धूम्रपान करने वालों और अधिक शराब पीने वालों को अधिक होती है। बच्चों में सूखा रोग कैल्शियम की कमी का ही लक्षण है।
विटामिन `डी´ की विशेष रूप से आवश्यकता कैल्शियम के समावेशन के लिए होती है। विटामिन `सी´ भी कैल्शियम के समावेशन में सुधार लाता है। सम्पूरक के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट भोजन के साथ अधिक अच्छे ढंग से समावेशित होता है।
दूध और इसके उत्पाद, दालें, सोयाबीन, हरी पत्तीदार सब्जियां, नींबू जाति के फल, सार्डीन, मटर, फलियां, मूंगफली, वाटनट (सिंघाड़ा), सूर्यमुखी के बीज इस खनिज के महत्वपूर्ण स्रोत हैं
सोडियम का परिचय (Introduction to sodium)
सोडियम शरीर की कोशिकाओं के अन्दर और बाहर पानी के संतुलन को बनाये रखने में सहायक होता है। इसकी कमी से पेशियों में ऐंठन, एडेमा हो सकता है, किंतु इसकी अधिकता से हानिकारक परिणाम जैसे उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारियां, जिगर का सूत्रणरोग और संकुलन सम्बंधी हृदय रोग हो सकते हैं। सोडियम मूत्र और विशेषत: पसीने में सोडियम क्लोराइड के रूप में निकलता है। कभी-कभी आहारों में जैव सोडियम आवश्यकता की पूर्ति के लिये पर्याप्त नहीं होता। अत: सोडियम क्लोराइड या खाने का नमक भोजन में शामिल करना पड़ता है।
सोडियम के मुख्य स्रोत हैं- संसाधित आहार, मांस और स्वयं सामान्य नमक। सोडियम की कमी से डरने की आवश्यकता नहीं है।
विटामिन `ए´ की कमी से होने वाले रोग (vitamin A)
विटामिन `ए´ की कमी से होने वाले रोग-
- फेफड़े व सांस की नली के रोग।
- सर्दी-जुकाम।
- नाक-कान के रोग।
- हड्डी व दांतों का कमजोर हो जाना।
- त्वचा का खुरदरा होना, पपड़ी उतरना।
- चर्म रोग, फोड़े-फुंसी, कील-मुंहासे, दाद, खाज।
- जांघ व कमर के ऊपरी भाग पर बालों के स्थान मोटे हो जाना।
- आंखों का तेज प्रकाश सहन न कर पाना, शाम व रात को कम दिखाई देना या अंधा हो जाना।
- गुर्दे या मूत्राशय में पथरी बन जाना।
- शरीर का वजन घट जाना।
- नाखून आसानी से टूट जाना।
- कब्ज होना।
- स्त्री-पुरुष की जननेद्रियां कमजोर पड़ जाना।
- तपेदिक (टी.बी.)।
- संग्रहणी, जलोदर।
विटामिन-ए से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें-
- विटामिन-`ए´ का आविष्कार 1931 में हुआ था।
- विटामिन-`ए´ जल में घुलनशील है।
- विटामिन-`ए´ तेल और वसा में घुल जाता है।
- विटामिन-`ए´ ‘शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता देता है।
- नन्हें बच्चों को विटामिन `ए´ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
- गर्भावस्था में स्त्री को विटामिन `ए´ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
- शरीर में संक्रामक रोगों के हो जाने पर विटामिन `ए´ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।
- विटामिन `ए´ की कमी से बहरापन होता है।
- सर्दी, खांसी, जुकाम, नजला जैसे रोग विटामिन `ए´ की कमी से होते हैं।
- फेफड़ों के संक्रमण विटामन `ए´ की कमी से होते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से रोगी तेज प्रकाश सहन नहीं कर पाता है।
- विटामिन `ए´ की कमी से कील-मुंहासे आदि कई चर्मरोग हो जाते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से आंखों में आंसू सूख जाते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से नाखून आसानी से टूटने लगते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से आंखों का रतौंधी रोग हो जाता है।
- विटामिन `ए´ की कमी से अनेक आंखों के रोग आ घेरते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से दांत कमजोर हो जाते हैं और दांतों का एनामेल बनने में रुकावट हो जाती है।
- दांतों में गड्ढे विटामिन `ए´ की कमी से होते हैं।
- विटामिन `ए´ की कमी से पुरुष के जननांगों पर प्रभाव पड़ता है।
- साइनस, नथुने, नाक, कान और गले, शिराओं, पतली रक्त वाहिनियों, माथे की रक्त वाहिनियों के संक्रमण विटामिन `ए´ की पूर्ति करने से दूर हो जाते हैं।
- स्कारलेट फीवर विटामिन `ए´ देने से ठीक हो जाता है।
- विटामिन `ए´ को संक्रमण विरोधी विटामिन की संज्ञा दी जाती है।
- विटामिन `ए´ की कमी से बच्चों की बढ़त थम जाती है।
- बच्चों को एक हजार से लेकर तीन हजार यूनिट आई, प्रतिदिन विटामिन `ए´ की आवश्यकता होती है।
- विटामिन `ए´ की कमी दिमाग की 8वीं नाड़ी पर बुरा प्रभाव डालती है।
- विटामिन `ए´ के प्रयोग से गुर्दों की पथरी का डर नहीं रहता। पथरी रेत के कण जैसी बनकर मूत्र से निकल जाती है।
- गिल्हड़ (घेंघा) रोग विटामिन `ए´ की कमी से होता है।
- दिल धड़कने वाले रोगी को विटामिन-ए´ के साथ विटामिन-बी1 भी देना चाहिए।
- विटामिन-`ए´ की कमी से स्त्री के जननांगों पर घातक प्रभाव पड़ता है।
- विटामिन-`ए´ की कमी से स्त्री का डिम्बाशय सिकुड़ जाता है।
- विटामिन-`ए´ की कमी से पुरुष के अण्डकोष सिकुड़ जाते हैं।
- विटामिन-`ए´ और `ई´ शरीर में घट जाने पर स्त्री और पुरुषों की संभोग करने की इच्छा नहीं रहती तथा सन्तान उत्पन्न करने की क्षमता भी समाप्त हो जाती है।
- विटामिन-`ए´ और `ई´ की कमी से पिट्यूटरी ग्लैण्ड की सक्रियता में बाधा हो जाती है।
- विटामिन-`ए´ से धमनियां और शिराएं मुलायम रहती हैं।
- विटामिन-`ए´ की कमी से बाल झड़ने लगते हैं।
- मछली के तेल में विटामिन-`ए´ सबसे अधिक होता है।
- विटामिन-`ए´ की कमी से सिर के बाल खुरदरे हो जाते हैं।
- विटामिन-`ए´ की कमी से भूख घट जाती है।
- विटामिन-`ए´ की कमी से मौसमी एलर्जी होती है।
- विटामिन-`ए´ की कमी से वजन गिर जाता है।
विटामिन `ए´ युक्त खाद्य (प्रति 100 ग्राम) | ||
क्र.स. | खाद्य | यूनिट |
1. | हरा धनिया | 10000 अ.ई. |
2. | पालक | 5500 अ.ई. |
3. | पत्तागोभी | 2000 अ.ई. |
4. | ताजा पोदीना | 2500 अ.ई. |
5. | हरी मेथी | 4000 अ.ई. |
6. | मूली के पत्ते | 6500 अ.ई. |
7. | पका पपीता | 2000 अ.ई. |
8. | टमाटर | 300 अ.ई. |
9. | गाजर | 3000 अ.ई. |
10. | पका आम | 45000 अ.ई. |
11. | काशीफल (सीताफल) | 1000 अ.ई. |
12. | हालीबुट लीवर ऑयल (मात्रा एक चम्मच) | 60000 अ.ई. |
13. | शार्क लीवर ऑयल (मात्रा एक चम्मच) | 6000 अ.ई. |
14. | बकरी की कलेजी | 22000 अ.ई. |
15. | दूध | 200 अ.ई. |
16. | अण्डा | 2000 अ.ई. |
17. | मक्खन | 2500 अ.ई. |
18. | घी | 2000 अ.ई. |
19. | भेड़ की कलेजी | 22000 अ.ई. |
निम्नलिखित खाद्य-पदार्थों में विटामिन-`ए´ अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। जिस रोगी को विटामिन-`ए´ की कमी हो जाए उसे नीचे लिखी तालिका से चुनकर खाद्य-पदार्थ प्रयोग कराना अतिशय गुणकारी होता है-
कमजोरी दूर करने के उपाय
लगभग 5-10 ग्राम मेथी के बीजों को सुबह-शाम गुड़ में मिलाकर सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है।
छाछ
छाछ पीने से स्रोतों, मार्गों की शुद्धि होकर रस का भलीप्रकार संचार होने लगता है तथा आंतों से संबन्धित कोई रोग नहीं होता है। नियमित रूप से छाछ पीने से शरीर की पुष्टि, बल, प्रसन्नता और चेहरे की चमक बढ़ती है। पिसी हुई अजवायन, कालानमक और छाछ
तीनों को मिलाकर भोजन के अन्त में नित्य कुछ दिनों तक पीने से लाभ होता है। छाछ में कालीमिर्च और नमक मिलाकर भी पी सकते हैं।
अंजीर
पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर किया गया नियमित सेवन 40 दिनों में सारी शारीरिक दुर्बलता दूर कर देता है। अच्छे पके हुए दो वजनदार अंजीर (अच्छा अंजीर वजन में लगभग 70 ग्राम का होता है।) मिश्री के साथ सुबह के समय खाना चाहिए इससे कमजोरी और गर्मी से राहत मिलती है। अंजीर को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।
4. टमाटर का सूप भूख को बढ़ाता है। यह खून की कमी को दूर करता है। थकावट व कमजोरी दूर करता है और चेहरे पर रौनक लाता है।
दूध
स्त्री-प्रसंग करने के बाद एक गिलास दूध में पांच बादाम पीसकर मिलाएं और एक चम्मच देशी घी डालें और पी जाएं। इस प्रयोग से बल मिलता है। नामर्दी दूर करने के लिए सर्दियों के मौसम में आधा ग्राम केसर डालकर पीना चाहिए।
Thursday, 26 November 2020
विटामिन `डी` की कमी से होने वाले रोग ( vitamin D)
विटामिन `डी` की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग-
- मज्जा तंतुओं की कमजोरी।
- क्षय रोग।
- सर्दी जुकाम बार-बार होना।
- शारीरिक कमजोरी।
- खून की कमी।
विटामिन `डी` युक्त खाद्यों की तालिका-
निम्नलिखित खाद्य-पदार्थो में विटामिन `डी´ पाया जाता है। जिन रोगियों के शरीर में विटामिन `डी´ की कमी होती है उनको औषधियों से चिकित्सा करने के साथ-साथ इन खाद्यों का प्रयोग भी करना चाहिए। विटामिन `डी´ प्राय: उन सभी खाद्यों में होता है जिनमें विटामिन `ए´ पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।
- ताजी साग-सब्जी।
- पत्तागोभी।
- पालक का साग।
- सरसों का साग।
- हरा पुदीना।
- हरा धनिया।
- गाजर।
- चुकन्दर।
- शलजम।
- टमाटर।
- नींबू।
- मालटा।
- मूली।
- मूली के पत्ते।
- काड लिवर ऑयल।
- हाली बुटलिवर ऑयल सलाद।
- सलाद।
- चोकर सहित गेंहूं की रोटी।
- सूर्य का प्रकाश।
- नारियल।
- मक्खन।
- घी।
- दूध।
- केला।
- पपीता
- मछली का तेल।
- शार्क लीवर ऑयल।
- अण्डे की जर्दी।
- बकरे की अण्डग्रंथियां।
विटामिन `डी´ से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें-
- विटामिन `डी´ का आविष्कार विड्स ने 1932 में किया था।
- विटामिन `ए´ की भांति विटामिन `डी´ भी तेल और वसा में घुल जाता है पर पानी में नहीं घुलता।
- जिन पदार्थो में विटामिन `ए´ रहता है विशेषकर उन्हीं में विटामिन `डी´ भी विद्यमान रहता है।
- मछली के तेल में विटामिन `डी´ अधिक पाया जाता है।
- विटामिन `डी´ की कमी हो जाने पर आंतें कैल्शियम तथा फास्फोरस को चूसकर रक्त में शामिल नहीं कर पाती हैं।
- सूर्य के प्रकाश में विटामिन `डी´ रहता है। कुछ चिकित्सक घावों, फोड़ों तथा रसौलियों की चिकित्सा सूर्य के प्रकाश से करते हैं।
- प्रातःकाल सूर्य के प्रकाश में लेटकर सरसों के तेल की मालिश पूरे शरीर पर की जाए तो शरीर को विटामिन `डी´ पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।
- सौर ऊर्जा से बने भोजन में पर्याप्त मात्रा में विटामिन `डी´ उपलब्ध होता है।
- भोजन को थोड़ी देर तक सूर्य के प्रकाश में रख दिया जाये तो उसमें विटामिन `डी´ पर्याप्त मात्रा में आ जाता है।
- चर्म रोगों की चिकित्सा के लिए विटामिन `डी´ अति उपयोगी है। इसलिए कई चर्म रोग सूर्य का प्रकाश दिखाने से ठीक हो जाते हैं। विटामिन डी का सूर्य से उतना ही सम्बंध है जितना शरीर का आत्मा से।
- विटामिन `डी´ मजबूत चमकीले दांतों के लिए अति आवश्यक है।
- विटामिन `डी´ हडि्डयों को मजबूत बनाता है।
- विटामिन `डी´ की कमी से हडि्डयां मुलायम हो जाती हैं।
- विटामिन `डी´ कमी से त्वचा खुश्क हो जाती है।
- जो लोग अंधेरे स्थानों में निवास करते हैं वे विटामिन `डी´ कमी के शिकार हो जाते हैं।
- विटामिन `डी´ की कमी से कूबड़ निकल आता है।
- विटामिन `डी´ की कमी से पेडू और पीठ की हडि्डयां मुड़ जाती हैं या मुलायम हो जाती है।
- ठण्डे मुल्कों के लोग विटामिन `डी´ की कमी के शिकार रहते हैं।
- प्राचीनकाल में लोग खुले वातावरण में रहते थे इसलिए वे बहुत कम रोगों के शिकार होते थे।
- श्वास रोगों को दूर करने के लिए विटामिन `डी´ बहुत असरकारक साबित होता है।
- गर्भावस्था में विटामिन `डी´ की अत्यधिक आवश्यकता पड़ती है। यदि गर्भवती स्त्री को विटामिन `डी´ की कमी हो जाये तो पैदा होने वाले बच्चे के दांत कमजोर निकलते हैं और जल्दी ही उनमें कीड़ा लग जाता है।
- विटामिन `डी´ के कारण दांतों में कीड़ा नहीं लगता।
- शरीर में विटामिन `डी´ की कमी से हडि्डयों में सूजन आ जाती है।
- गर्म देश होने के बाद भी भारत के लोगों में सामान्यत: कमजोर अस्थियों का रोग पाया जाता है।
- केवल अनाज पर निर्भर रहने वाले लोग अक्सर अस्थिमृदुलता (हडि्डयों का कमजोर होना) के शिकार हो जाते हैं।
- बच्चे की खोपड़ी की हडि्डयां तीन मास के बाद भी नर्म रहे तो समझना चाहिए कि विटामिन `डी´ की अत्यधिक कमी हो रही है।
- विटामिन `डी´ की प्रचुर मात्रा शरीर में रहने से चेहरा भरा-भरा, चमक लिए रहता है।
- पर्दे में रहने वाली अधिकांश स्त्रियां विटामिन `डी´ की कमी की शिकार रहती हैं।
- जिन रोगियों को विटामिन `डी´ की कमी से अस्थिमृदुलता तथा अस्थि शोथ रहता है वे अक्सर धनुवार्त के शिकार भी हो जाते हैं।
- भारत में विटामिन `डी´ की कमी को दूर करने के लिए बच्चे को बचपन से ही मछली का तेल पिलाना हितकारी होता है।
- बच्चों, गर्भावस्था और दूध पिलाने की अवस्था में विटामिन `डी´ का सेवन बहुत जरूरी होता है।
- व्यक्ति को बचपन के बाद जवानी और बुढ़ापे में भी मछली का तेल नियमित रूप से पिलाते रहना चाहिए। इससे शरीर में विटामिन `डी´ की पर्याप्त मात्रा बनी रहती है।
- बुढ़ापे में विटामिन `डी´ की कमी हो जाने पर जोड़ों का दर्द प्रारंभ हो जाता है।
- विटामिन `डी´ की कमी से हल्की सी दुर्घटना हो जाने पर भी हडि्डयां टूट जाती हैं।
- विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों की खोपड़ी बहुत बड़ी तथा चौकोर सी हो जाती है।
- विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों के पुट्ठे कमजोर हो जाते हैं।
- विटामिन `डी´ की कमी से बच्चों का चेहरा पीला, निस्तेज, कान्तिहीन दृष्टिगोचर होने लगता है।
- विटामिन `डी´ की कमी के कारण बच्चा बिना कारण रोता रहता है।
- विटामिन `डी´ की कमी से बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है तथा उसको कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।
- यदि वयस्कों के शरीर में विटामिन `डी´ की कमी हो जाये तो प्रारंभ में उनको कमर और कुल्हों की वेदना सताती है।
- यदि वयस्कों को विटामिन-डी की अत्यधिक कमी हो जाये तो उनके पेडू और कूल्हे की हडि्डयां मुड़कर कुरूप हो जाती हैं।
- शरीर में विटामिन `डी´ की कमी से सीढ़ियां चढ़ने पर रोगी को कष्ट होता है।
- शीतपित्त रोग के पीछे शरीर में विटामिन `डी´ की कमी होती है अत: इस रोग की औषधियों के साथ विटामिन `डी´ का प्रयोग भी लाभ प्रदान करता है।
- विटामिन `डी´ की कमी को दूर करने के लिए कच्चा अण्डा प्रयोग करना हितकर होता है।
- सर्दियों तथा बरसात के मौसम में बच्चों, बूढ़ों तथा जवानों को समान रूप से विटामिन `डी´ की अधिक आवश्यकता रहती है।
- विटामिन `डी´ की अधिकता से दिमाग की नसें शक्तिशाली और लचीली हो जाती हैं।
- विटामिन `डी´ सब्जियों में नहीं पाया जाता है।
- अण्डा, मक्खन, दूध, कलेजी में विटामिन `डी´ ज्यादा मात्रा में रहता है।
- ग्रामीण लोगों को सूर्य की किरणों से पर्याप्त विटामिन `डी´ मिल जाता है।
- ग्रामीण लोगों की अपेक्षा शहरी लोग अधिक विटामिन `डी´ की कमी के शिकार होते हैं।
- पुरुषों को प्रतिदिन 400 से 600 यूनिट विटामिन `डी´ की आवश्यकता होती है। दूध पीते बच्चों को भी इतनी ही आवश्यकता होती है।
- अस्थिशोथ (रिकेट्स) तथा निर्बलता में 4 से 20 हजार अंतर्राष्ट्रीय यूनिट विटामिन `डी´ की आवश्यकता होती है।
कैल्शियमयुक्त खाद्य (प्रति 100 ग्राम)
विटामिन `ई´ vitamin E
विटामिन `ई´ की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग-
विटामिन `ई` युक्त खाद्यों की तालिका-
विटामिन `ई´ की महत्वपूर्ण बातें-
- विटामिन `ई´ वसा में घुलनशील होता है।
- अंकुरित अनाज तथा शाक-भाजियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- अंतरिक्ष यात्रियों में ऑक्सीजन की अधिकता से रक्तहीनता का दोष पैदा हो जाता है जो विटामिन `ई´ से ठीक हो जाता है।
- विटामिन `ई´ में किसी भी प्रकार की वेदना को दूर करने का विशेष गुण रहता है।
- शरीर में विटामिन `ई´ की कमी हो जाने से किसी भी रोग का संक्रमण जल्दी लग जाता है।
- विटामिन `ई´ की कमी होते ही क्रमश: विटामिन `ए´ भी शरीर से नष्ट होने लगता है।
- गेहूं के तेल में विटामिन `ई´ भरपूर रहता है।
- सलाद, अण्डे तथा मांस आदि में विटामिन `ई´ बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है।
- स्त्रियों का बांझपन शरीर में विटामिन `ई´ की कमी के कारण होता है।
- विटामिन `ई´ को टेकोफेरोल भी कहा जाता है।
- विटामिन `ई´ का महिलाओं के बांझपन, बार-बार गर्भ गिर जाने, बच्चा मरा हुआ पैदा होने जैसे रोगों को रोकने के लिए सफलतापूर्वक पूरे संसार में प्रयोग किया जा रहा है।
- आग से जल जाने वाले रोगी के लिए विटामिन `ई´ ईश्वरीय वरदान कहा जाता है इसके प्रयोग से जले हुए रोगी को संक्रमण भी नहीं लगता है।
- प्रजनन अंगों पर विटामिन `ई´ विशेष रूप से प्रभाव पैदा करता है।
- विटामिन `ई´ पर ताप का कोई प्रभाव पैदा नहीं होता है।
- पुरुषों की नपुंसकता का एक कारण शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाना भी होता है।
- बिनौले में पर्याप्त विटामिन `ई´ मौजूद रहता है।
- शिराओं के भंयकर घाव, गैंग्रीन आदि विटामिन `ई´ के प्रयोग से समाप्त हो जाते हैं।
- शरीर में विटामिन `ई´ पर्याप्त रहने पर विटामिन `ए´ की शरीर को कम आवश्यकता पड़ती है।
- हार्मोंस संतुलन के लिए विटामिन `ई´ का महत्वपूर्ण योगदान है।
- विटामिन `ई´ की कमी से थायराइड ग्लैण्ड तथा पिट्यूटरी ग्लैण्ड की क्रियाओं में बाधा उत्पन्न हो जाती है।
- विटामिन `ई´ की कमी से स्त्री के स्तन सिकुड़ जाते हैं और छाती सपाट हो जाती है।
- मानसिक रोगों से ग्रस्त रोगियों को विटामिन `ई´ प्रयोग कराने से लाभ होता है।
- स्त्रियों में कामश्वासना लोप हो जाने पर विटामिन `ई´ का प्रयोग कराने से लाभ होता है।
विटामिन भोजन का परिचय ( vitamin)
भोजन हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी होता है उससे कहीं अधिक यह जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। यह शरीर में शक्ति और ऊष्णता पैदा करता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान लम्बे समय से भोजन से संबंधित खोजों में लगा हुआ है। संसार के प्रत्येक देशों और वहां की भिन्न-भिन्न जातियों, उपजातियों का भोजन भी अलग-अलग प्रकार का होता है। यदि व्यवहारिक दृष्टि से देखा जाए तो भोजन पूरे संसार में केवल दो प्रकार का ही सर्वमान्य है शाकाहारी एवं मांसाहारी। हालांकि पूरे संसार में मांसाहार करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। अमेरिका और अन्य कई शक्ति सम्पंन देशों के चिकित्सा वैज्ञानिकों ने भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के भोजन सम्बंधी सिद्धांत को एक मत से स्वीकार करते हुए कहा है कि मांसाहार मनुष्य का स्वाभाविक भोजन नहीं है। मांसाहारियों की अपेक्षा शाकाहारी मनुष्य लंबी और निरोगी आयु जीते हैं।
वर्तमान में जो भोजन प्रचलित है उसमें निम्न मुख्य तत्व विद्यमान रहते हैं-
- प्रोटीन।
- कार्बोहाइड्रेट्स।
- वसा।
- काष्ठोज।
- लवण तथा खनिज।
- जल।
- विटामिन।
Tuesday, 24 November 2020
क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?
क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के...
