Saturday, 28 November 2020

शरीर के लिए जरूरी विटामिन,Body essential vitamins (vitamin B) in hindi

.विटमिन बी-12 के फायदे- विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने में सहायता करता है। ये ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न?व्र्स के कुछ तत्वों की रचना करता है। लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। ये शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है। यह ऎसा विटमिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। वहां लैक्टो बैसिलस मौजूद होते हैंए जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। फि र यह लिवर में जाकर स्टोर होता है। उसके बाद शरीर के जिन हिस्सों को इसकी जरूरत होती है, लिवर इसे वहां भेजने का काम करता जाता है। 2.विटमिन बी-12 की कमी होने के नुकसान- विटमिन बी.12 की कमी होने से हाथ.पैरों में झनझनाहट और जलन होती है। व्यवहार में अस्थिरताए अनावश्यक थकानए डिप्रेशन और याद्दाश्त में कमी हो सकती है। विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाने पर इससे स्पाइनल कॉर्ड के न?व्र्स नष्ट होने लगते हैंण् ऎसी स्थिति में पैरालिसिस तक हो सकता ह। 3.खानपान का रखें ध्यान रखें- शाकाहारी लोगों को दूध, दही, मक्खन, सोया मिल्क और पनीर का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। विटमिन बी-12 की कमी को दूर करने के लिए नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फू ड खाना चाहिए। अपनी ओर से हम हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की कोशिश करते हैं। फि र भी आज की अति व्यस्त जीवनशैली की वजह से हमारे खान-पान में कोई न कोई ऎसी कमी रह ही जाती है, जिससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हमें परेशान करने लगती हैं। वैसे तो सभी विटमिंस और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी होते हैं।विटमिन बी-12 एक ऎसा तत्व है, जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। 4.क्या है कमी की वजह - इसका सबसे बड़ा कारण है आनुवंशिकता। यदि आंतों की कोई भी सर्जरी हुई हो तो इससे विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है। क्रोंज्स नामक आंतों की बीमारीए जिसकी वजह से आंतें विटमिन बी-12 का अवशोषण नहीं कर पातीं। अगर व्यक्ति को लंबे समय तक एनीमिया की समस्या रही हो तो उसमें भी विटामिन में बी-12 की कमी पाई जा सकती है। इसकी कमी से होने वाली समस्या को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है। अगर डायबिटीज की दवा मेटफ ॉर्मिन का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो भी आंतों में मौजूद विटमिन बी-12 नष्ट हो जाता है। शाकाहरी लोगों में इस समस्या की आशंका अधिक रहती है क्योंकि यह विटामिन मुख्यत एनिमल प्रोडक्ट्स में ही पाया जाता है। एशियाई देशों में खास तौर पर भारत में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि यहां की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा शाकाहारी है। 5.इसकी कमी को पहचानें कैसे अगर शरीर में विटमिन बी-12 की कमी हो तो प्रायरू ऎसे लक्षण देखने को मिलते हैं। हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन होना इसकी कमी को दर्शाता है। याद्दाश्त में कमी आने लगती है। व्यवहार में अस्थिरता आने लगती है। अनावश्यक थकान आने लगती है। डिप्रेशन आने लगता है। अगर शरीर में विटामिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कॉर्ड के नव्र्स नष्ट होने लगते हैं। ऎसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस तक हो सकता है। विटमिन बी-12 शरीर के हर हिस्से के नव्र्स को प्रोटीन देने का काम करता है। 6.उपचार एवं बचाव अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए सीरम विटमिन बी-12 की जांच करवानी चाहिए। अकसर लोग इसके लक्षणों को मामूली थकान या एनीमिया समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। पर ऎसा करना उचित नहीं है क्योंकि आगे चलकर यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है। शाकाहारी लोगों को अपने खानपान के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी मात्रा 400.500 पिकोग्राम मिली लीटर होनी चाहिए। अगर शरीर में इसकी मात्रा इससे कम हो जाए तो व्यक्ति को मिथाइल कोबालामिन नामक टैबलेट या इंजेक्शन दिया जाता है। दवा की मात्रा मर्ज की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। यह दवा आंतों में मौजूद लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया को सçRय करने का काम करती हैं। अगर सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए तो दवाओं और स्वस्थ खानपान से इस समस्या का समाधान हो जाता है। 7.खानपान में विटमिन बी-12 अकसर यह सवाल उठता है कि हमें अपने खानपान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर में विटमिन बी-12 की कमी न हो। यहां वेजटेरियन और नॉन वेजटेरियन लोगों के लिए दी जा रही है, कुछ ऎसी चीजों की सूची, जिनमें विटमिन बी-12 पाया जाता है। 8.वेजटेरियन शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उनके पास विटमिन बी-12 हासिल करने के स्त्रोत सीमित संख्या में होते हैं, इसलिए उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन,सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। बी-12 मुख्यत मिट्टी में पाया जाता है। इसलिए यह जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे-आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी आंशिक रूप से पाया जाता है। इसके अलावा 45 मल्टीग्रेन ब्रेड और वे प्रोटीन पाउडर भी इसके अच्छे स्त्रोत हैं। यदि एक किलोग्राम आटे में 100 ग्राम वे प्रोटीन पाउडर मिला दिया जाए तो इससे व्यक्ति को विटमिन बी-12 का पोषण मिल जाता है। 9.नॉनवेज नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फूड से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है, पर इनके ज्यादा सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जो नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए नॉनवेज का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए। हमें रोजाना औसतन 2.4 माइक्रोग्राम विटमिन बी-12 की जरूरत होती है, जो शाकाहारी लोगों को सामान्यत- 3 ग्लास दूध,3 कटोरी दही, 80 ग्राम पनीर के अलावा खाने में 4.4 मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियां, 4.5 मल्टीग्रेन ब्रेड, ओट्स और बिस्किट के सेवन से मिल जाता है। नॉन-वेजटेरियन लोगों को नाश्ते में नियमित रूप से एक उबले अंडे के अलावा लंच और डिनर में चिकेन या फि श के दो पीसेज लेने चाहिए।

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