Thursday, 3 December 2020

benefits of eating apples in hindi,सेब खाने के फायदे

प्राकृतिक दृष्टि से मीठा सेब गर्म व आर्द्र होता है जबकि खट्टा सेब ठंडा एवं शुष्क होता है परंतु खट्टा मीठा सेब संतुलित और थोड़ा शष्क होता है। सेब के पेड़ का समस्त भाग ठंडा व शुष्क होता है और उसके पत्ते और फल में विष विरोधी शक्ति होती है। कच्चा सेब खाने से कब्ज़ होता है और वह दस्त को ठीक कर देता है। सेब एक प्राकृति दातून है जो दातों की सफाई के अतिरिक्त संक्रमण रोधी होता है और दातों को मज़बूत करता है। सेब का पत्ता मूत्रवर्धक है और उसके पत्ते से बने हुए काढ़े का प्रयोग गुर्दे का वरम एवं उससे जड़ी समस्याओं के उपचार के लिए होता हे सेब खाने से भूख बढ़ती है। सेब खाने से भय और अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायता मिलती है। फंसी हुआ आवाज़ के उपचार के लिए सेब खाते हैं और इसी प्रकार खांसी, बवासीर, स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों और मोटापे की समस्या से ग्रस्त लोगों के उपचार में भी सेब का सेवन बहुत लाभदायक है। सेब में विटामिन ए बी और सी पाइ जाती है जो आंख, चमड़ा, बाल और नाखून की मज़बूती के लिए बहुत लाभदायक है। गुर्दे की पथरी निकालने में सेब का सेवन प्रभावी है। सेब को उसके छिलके के साथ खाना चाहिये क्योंकि जो विटामिन पूरे सेब में होती है उससे गुना अधिक विटामिन केवल उसके छिलके में होती है। पका हुआ सेब खाने से नींद आती है और उससे आराम मिलता है। सेब खाने से बदहज़्मी व अपच की समस्या दूर करने में सहायता मिलती है। ज़ुकाम और काली खांसी के उपचार के लिए सेब के शर्बत का प्रयोग होता है। सेब के सेवन से जोड़ों के दर्द को दूर करने में सहायता मिलती है।

Chromium in hindi क्रोमियमखून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाज,मक्के का तेल, सील मछली,कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया

Wednesday, 2 December 2020

Fundamental Rights in hindi मौलिक अधिकार in hindi

मौलिक अधिकार भाग -3 मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक) (अमेरिका से लिये) मौलिक अधिकारों से तात्पर्य वे अधिकार जो व्यक्तियों के सर्वागिण विकास के लिए आवश्यक होते है इन्हें राज्य या समाज द्वारा प्रदान किया जाता है।तथा इनके संरक्षण कि व्यवस्था की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 10 दिसम्बर 1948 को वैश्विक मानवाधिकारो की घोषणा की गई इसलिए प्रत्येक 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। भारतीय संविधान में 7 मौलिक अधिकारों का वर्णन दिया गया था। समानता का अधिकारा - अनुच्छेद 14 से 18 तक स्वतंन्त्रता का अधिकार - अनुच्छेद 19 से 22 तक शोषण के विरूद्ध अधिकार - अनुच्छेद 23 व 24 धार्मिक स्वतंन्त्रता का अधिकार - अनुच्छेद 25 से 28 तक शिक्षा एवम् संस्कृति का अधिकार - अनुच्छेद 29 और 30 सम्पति का अधिकार - अनुच्छेद 31 सवैधानिक उपचारो का अधिकार - अनुच्छेद 32 अनुच्छेद - 12 राज्य की परिभाषा अनुच्छेद - 13 राज्य मौलिक अधिकारों का न्युन(अतिक्रमण) करने विधियों को नहीं बनाऐंगा। 44 वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा "सम्पति के मौलिक अधिकार" को इस श्रेणी से हटाकर "सामान्य विधिक अधिकार" बनाकर 'अनुच्छेद 300(क)' में जोड़ा गया है। वर्तमान में मौलिक अधिकारों की संख्या 6 है। समानता का अधिकार- अनच्छेद 14 से अनुच्छेद 18 अनुच्छेद - 14 विधी कके समक्ष समानता ब्रिटेन से तथा विधि का समान सरंक्षण अमेरिका से लिया अनुच्छेद - 15 राज्य जाती धर्म लिंग वर्ण, आयु और निवास स्थान के समक्ष भेदभाव नहीं करेगा। राज्य सर्वाजनिक स्थलों पर प्रवेश से पाबन्दियां नहीं लगायेगा। अनुच्छेद 15(3) के अन्तर्गत राज्य महीलाओं और बालकों को विशेष सुविधा उपलब्ध करवा सकता है। अनुच्छेद - 16 लोक नियोजन में अवसर की समानता(सरकारी नौकरीयों में आरक्षण का प्रावधान) अनुच्छेद 16(1) राज्य जाती, धर्म, लिंग वर्ण और आयु और निवास स्थान के आधार पर नौकरी प्रदान करने में भेदभाव नहीं करेगा लेकिन राज्य किसी प्रान्त के निवासियो को छोटी नौकरीयों में कानुन बनाकर संरक्षण प्रदान कर सकता है। अनुच्छेद 16(4) के अन्तर्गत राज्य पिछडे वर्ग के नागरिको को विशेष संरक्षण प्रदान कर सकता है। इसमें भुमिपुत्र का सिद्धान्त दिया गया है। अनुच्छेद - 17 अस्पृश्यता/छुआ छुत का अन्त - भारतीय संसद ने अस्पृश्यता निशेध अधिनियम 1955 बनाकर इसे दण्डनिय अपराध घाषित किया है। अनुच्छेद - 18 उपाधियों का अन्त किया गया है राज्य सैन्य और शैक्षिक क्षेत्र के अलावा उपाधि प्रदान नहीं करेगा(वर्तमान में समाज सेवा केा जोड़ा गया) ।उपाधि ग्रहण करने से पुर्व देश के नागरिक तथा विदेशी व्यक्तियों को राष्ट्रपति की अनुमति लेना आवश्यक है

Tuesday, 1 December 2020

Potassium in hindi , पोटेशियम

पोटेशियम मूल खनिज है। इसके बिना जीवन सम्भव नहीं है। पोटेशियम हमेशा किसी एसिड के साथ पाया जाता है। खनिज की कमी वाली मिट्टी खनिज की कमी वाला आहार उत्पन्न करती है। इस प्रकार के आहार का अंतर्ग्रहण शरीर की कोशिकाओं से पोटेशियम लेने के लिए विवश करता है जिससे सम्पूर्ण शरीर-रसायन विक्षुब्ध हो जाता है। पोटेशियम की कमी विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में सूखा हुआ राख, कोयला या विशिष्ट प्रकार की मिट्टी भी खाने की इच्छा पैदा करता है। पोटेशियम पेशियों, स्नायुओं की सामान्य शक्ति, हृदय की क्रिया और एन्जाइम प्रतिक्रयाओं के लिए आवश्यक है। यह शरीर के तरल संतुलन को नियमित करने में सहायक होता है। इसकी कमी से स्मरण-शक्ति का ह्रास पेशियों की कमजोरी, अनियमित हृदय-गति और चिड़चिड़ापन जैसे रोग हो सकते हैं। इसकी अधिकता से हृदय की अनियमितताएं हो सकती हैं। पोटेशियम कोमल ऊतकों के लिये वही है जो कैल्शियम शरीर के कठोर ऊतकों के लिए है। यह कोशिकाओं के भीतर और बाहर के तरलों का विद्युत-अपघटनी संतुलन बनाये रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आयु के साथ पोटेशियम का अर्न्तग्रहण भी बढ़ना आवश्यक है। पोटेशियम की कमी मानसिक सतर्कता के अभाव, पेशियों की थकावट, विश्राम करने में कठिनाई, सर्दी-जुकाम, कब्ज, जी मिचलाना, त्वचा की खुजली और शरीर की मांस-पेशियों में ऐंठन के रूप में प्रतिबिम्बित होती है। सोडियम का बढ़ा हुआ अर्न्तग्रहण शरीर की कोशिकाओं में से पोटेशियम की हानि को बढ़ा देता है। अधिक पोटेशियम से रक्त-नलिकाओं की दीवारें कैल्शियम निक्षेप से मुक्त रखी जा सकती है। विकसित देशों में सेब के आसव का सिरका पोटेशियम का एक उत्तम स्रोत है एक चम्मच सेब के आसव के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाइए और इसकी धीरे-धीरे चुस्की लीजिए। यह शरीर की वसाओं को जलाने में मदद करता है। गायों पर किये गये प्रयोगों में सेब के आसव के सिरके से गायों में गठिया समाप्त हो गया और दूध का उत्पादन बढ़ गया। पोटेशियम के महत्वपूर्ण स्रोत- सूखा हुआ बिना मलाई के दूध का पाउडर, गेहूं के अंकुर, छुहारे, खमीर, आलू, मूंगफली, बन्दगोभी, मटर, केले, सूखे मेवे, नारंगी और अन्य फलों के रस, खरबूजे के बीज, मुर्गे, मछली और सबसे अधिक पैपरिका और सेब के आसव का सिरका।

Sunday, 29 November 2020

Manganese in hindi मैगनीज,

मैगनीज शरीर के सुरक्षा-तंत्रों से सीधे सम्बद्ध है। यह विधि एंजाइमों को सक्रिय करता है और विटामिन `बी´ तथा `ई´ के उचित उपयोग में सहायता देता है। यह पाचन में मदद करता है। मैगनीज मधुमेह के लिए अच्छा है क्योंकि यह ग्लूकोज सहन शक्ति बढ़ाता है। आमतौर से मैगनीज की कमी मानवों में नहीं पाई जाती। इसकी अधिक मात्रा शरीर की लोहा सोखने की क्षमता कम कर देती है। मैगनीज के स्रोत- एक कप काली चाय, गिरीदार फल, बीज, सम्पूर्ण अनाज, चोकर, मछली और मांस।

Chromium in hindi क्रोमियम,

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाजी, मक्के का तेल, सील मछली, कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया जाता है।

जस्ता, Zinc in hindi

जस्ता शरीर में कई एंजाइमों के लिए सह-घटक के रूप में कई कार्य करता है। यह ऊतकों के सामान्य कार्य में सहायता करता है और शरीर में प्रोटीन और कार्बोज को सम्भालने के लिए आवश्यक है। शरीर में जस्ते की कमी मद्यपान, आहार की प्रतिक्रिया, कम प्रोटीन के आहार, जुकाम, गर्भावस्था और रोग के कारण हो सकती है। जस्ते की कमी होने से स्वाद और भूख की कमी, घाव का देर से भरना, गंजापन, विकास रुकना, हृदय-रोग, मानसिक रोग और प्रजनन-सम्बंधी विकार हो जाते हैं। कुछ मध्य-पूर्व के देशों में बौनेपन का कारण आहार में जस्ते की कमी माना जाता है। जस्ते के स्रोत- सभी अनाज, मलाई निकाला हुआ दूध, संसाधित पनीर, खमीर, गिरीदार फल, बीज, गेहूं के अंकुर, चोकर, बिना पॉलिश किया हुआ चावल, पालक, मटर, कॉटेज पनीर, समुद्र से प्राप्त होने वाला आहार, मुर्गे-अण्डे। सम्पूर्ण गेहूं के आटे के उत्पादों में सफेद आटे की अपेक्षा चार गुना अधिक जस्ता होता है।

Copper in hindi कॉपर, Copper

कॉपर कई एन्जाइमों में पाया जाता है। विष का प्रभाव कम करने और संक्रामक रोगों में इसका सेवन किया जाता है। कॉपर लेने से लौह, विटामिन-सी तथा जिंक को पचाने में मदद मिलती है। लाल रक्त कणिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) कॉपर के बिना नहीं बन सकती। शरीर में इसकी कमी से व्यक्ति `एनीमिक´ (खून की कमी से ग्रस्त) हो सकता है। जैतून और गिरीदार फल में यह पाया जाता है। इसे दो मिलीग्राम से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। हमारे शरीर को दूसरे माध्यमों से कॉपर मिलता रहता है जैसे तांबे के बर्तनों, पानी के पाइपों, दवाओं खाद्य-प्रसंस्करणों (फूड प्रोसेसिंग), सुंगंधों और फसलों पर छिड़की जानेवाली दवाओं आदि से

एल्यूमीनियम, Aluminum in hindi

एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग बनाते हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है। हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है।

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के...