Sunday, 29 November 2020

Chromium in hindi क्रोमियम,

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाजी, मक्के का तेल, सील मछली, कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया जाता है।

जस्ता, Zinc in hindi

जस्ता शरीर में कई एंजाइमों के लिए सह-घटक के रूप में कई कार्य करता है। यह ऊतकों के सामान्य कार्य में सहायता करता है और शरीर में प्रोटीन और कार्बोज को सम्भालने के लिए आवश्यक है। शरीर में जस्ते की कमी मद्यपान, आहार की प्रतिक्रिया, कम प्रोटीन के आहार, जुकाम, गर्भावस्था और रोग के कारण हो सकती है। जस्ते की कमी होने से स्वाद और भूख की कमी, घाव का देर से भरना, गंजापन, विकास रुकना, हृदय-रोग, मानसिक रोग और प्रजनन-सम्बंधी विकार हो जाते हैं। कुछ मध्य-पूर्व के देशों में बौनेपन का कारण आहार में जस्ते की कमी माना जाता है। जस्ते के स्रोत- सभी अनाज, मलाई निकाला हुआ दूध, संसाधित पनीर, खमीर, गिरीदार फल, बीज, गेहूं के अंकुर, चोकर, बिना पॉलिश किया हुआ चावल, पालक, मटर, कॉटेज पनीर, समुद्र से प्राप्त होने वाला आहार, मुर्गे-अण्डे। सम्पूर्ण गेहूं के आटे के उत्पादों में सफेद आटे की अपेक्षा चार गुना अधिक जस्ता होता है।

Copper in hindi कॉपर, Copper

कॉपर कई एन्जाइमों में पाया जाता है। विष का प्रभाव कम करने और संक्रामक रोगों में इसका सेवन किया जाता है। कॉपर लेने से लौह, विटामिन-सी तथा जिंक को पचाने में मदद मिलती है। लाल रक्त कणिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) कॉपर के बिना नहीं बन सकती। शरीर में इसकी कमी से व्यक्ति `एनीमिक´ (खून की कमी से ग्रस्त) हो सकता है। जैतून और गिरीदार फल में यह पाया जाता है। इसे दो मिलीग्राम से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। हमारे शरीर को दूसरे माध्यमों से कॉपर मिलता रहता है जैसे तांबे के बर्तनों, पानी के पाइपों, दवाओं खाद्य-प्रसंस्करणों (फूड प्रोसेसिंग), सुंगंधों और फसलों पर छिड़की जानेवाली दवाओं आदि से

एल्यूमीनियम, Aluminum in hindi

एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग बनाते हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है। हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है।

Saturday, 28 November 2020

विटामिन ए के लाभ , Benefits of vitamin a in hindi

विटामिन शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप में चलाने में मदद करता है। विटामिन ए की खुराक न लेने से सर्दी-जुकाम, नाक-कान के रोग, सांस संबंधी समस्याएं,दांतों का कमजोर होना, त्वचा का शुष्की होना, चर्मरोग, पथरी होना, कब्ज होना इत्यादि समस्याएं होती है। विटामिन ए की कमी से शरीर नुकसान पहुंचता है। विटामिन ए का कार्य स्किन, बाल, नाखून, ग्रंथि, दांत, मसूड़े और हड्डी आदि को सामान्य रूप से बनाये रखना है। बच्चों में खासकर विटामिन ए की आपूर्ति करना आवश्यक है। आइए जानें विटामिन ए के लाभों के बारे में। विटामिन ए की कमी के कारण आंखों को कम दिखाई देने लगता है, आंखों में पानी आता रहता है। विटामिन ए की कमी से बाल झड़ने लगते हैं। सिर के बाल खुरदरे हो जाते हैं और एलर्जी भी हो सकती है। विटामिन ए की कमी से भूख भी कम लगती है। विटामिन ए की कमी से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है और बच्चों के कद पर भी असर पड़ सकता है। स्किन और बालों में रूखापन आ सकता है। इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। विटामिन ए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर के विभिन्ने रोगों से लड़ने के काबिल बनाता है। विटामिन ए से फेफड़े व सांस की नली के रोग दूर रहते हैं , हड्डियां मजबूत बनाती हैं, कील-मुंहासे दूर होते हैं और चेहरे पर निखार आता है ,इससे दाद, खाज- खुजली जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है, शरीर की सूजन भी दूर होती है। विटामिन ए की कमी से शाम व रात को कम दिखाई देता है, इस समस्या को रतौंधी कहते हैं शरीर का वजन कम हो जाता है जननेद्रियां कमजोर पड़ जाती है। टमाटर, गाजर, पपीता, हरी धनिया, पत्ता गोभी, अंडा, दूध, मक्खन, घी, मेथी, पालक, पुदीना, ककड़ी, चुकुंदर, सरसो के साग, नाशपाती और मछली इत्यादि में भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है।

शरीर के लिए जरूरी विटामिन,Body essential vitamins (vitamin B) in hindi

.विटमिन बी-12 के फायदे- विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने में सहायता करता है। ये ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न?व्र्स के कुछ तत्वों की रचना करता है। लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। ये शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है। यह ऎसा विटमिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। वहां लैक्टो बैसिलस मौजूद होते हैंए जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। फि र यह लिवर में जाकर स्टोर होता है। उसके बाद शरीर के जिन हिस्सों को इसकी जरूरत होती है, लिवर इसे वहां भेजने का काम करता जाता है। 2.विटमिन बी-12 की कमी होने के नुकसान- विटमिन बी.12 की कमी होने से हाथ.पैरों में झनझनाहट और जलन होती है। व्यवहार में अस्थिरताए अनावश्यक थकानए डिप्रेशन और याद्दाश्त में कमी हो सकती है। विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाने पर इससे स्पाइनल कॉर्ड के न?व्र्स नष्ट होने लगते हैंण् ऎसी स्थिति में पैरालिसिस तक हो सकता ह। 3.खानपान का रखें ध्यान रखें- शाकाहारी लोगों को दूध, दही, मक्खन, सोया मिल्क और पनीर का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। विटमिन बी-12 की कमी को दूर करने के लिए नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फू ड खाना चाहिए। अपनी ओर से हम हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की कोशिश करते हैं। फि र भी आज की अति व्यस्त जीवनशैली की वजह से हमारे खान-पान में कोई न कोई ऎसी कमी रह ही जाती है, जिससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हमें परेशान करने लगती हैं। वैसे तो सभी विटमिंस और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी होते हैं।विटमिन बी-12 एक ऎसा तत्व है, जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। 4.क्या है कमी की वजह - इसका सबसे बड़ा कारण है आनुवंशिकता। यदि आंतों की कोई भी सर्जरी हुई हो तो इससे विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है। क्रोंज्स नामक आंतों की बीमारीए जिसकी वजह से आंतें विटमिन बी-12 का अवशोषण नहीं कर पातीं। अगर व्यक्ति को लंबे समय तक एनीमिया की समस्या रही हो तो उसमें भी विटामिन में बी-12 की कमी पाई जा सकती है। इसकी कमी से होने वाली समस्या को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है। अगर डायबिटीज की दवा मेटफ ॉर्मिन का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो भी आंतों में मौजूद विटमिन बी-12 नष्ट हो जाता है। शाकाहरी लोगों में इस समस्या की आशंका अधिक रहती है क्योंकि यह विटामिन मुख्यत एनिमल प्रोडक्ट्स में ही पाया जाता है। एशियाई देशों में खास तौर पर भारत में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि यहां की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा शाकाहारी है। 5.इसकी कमी को पहचानें कैसे अगर शरीर में विटमिन बी-12 की कमी हो तो प्रायरू ऎसे लक्षण देखने को मिलते हैं। हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन होना इसकी कमी को दर्शाता है। याद्दाश्त में कमी आने लगती है। व्यवहार में अस्थिरता आने लगती है। अनावश्यक थकान आने लगती है। डिप्रेशन आने लगता है। अगर शरीर में विटामिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कॉर्ड के नव्र्स नष्ट होने लगते हैं। ऎसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस तक हो सकता है। विटमिन बी-12 शरीर के हर हिस्से के नव्र्स को प्रोटीन देने का काम करता है। 6.उपचार एवं बचाव अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए सीरम विटमिन बी-12 की जांच करवानी चाहिए। अकसर लोग इसके लक्षणों को मामूली थकान या एनीमिया समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। पर ऎसा करना उचित नहीं है क्योंकि आगे चलकर यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है। शाकाहारी लोगों को अपने खानपान के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी मात्रा 400.500 पिकोग्राम मिली लीटर होनी चाहिए। अगर शरीर में इसकी मात्रा इससे कम हो जाए तो व्यक्ति को मिथाइल कोबालामिन नामक टैबलेट या इंजेक्शन दिया जाता है। दवा की मात्रा मर्ज की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। यह दवा आंतों में मौजूद लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया को सçRय करने का काम करती हैं। अगर सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए तो दवाओं और स्वस्थ खानपान से इस समस्या का समाधान हो जाता है। 7.खानपान में विटमिन बी-12 अकसर यह सवाल उठता है कि हमें अपने खानपान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर में विटमिन बी-12 की कमी न हो। यहां वेजटेरियन और नॉन वेजटेरियन लोगों के लिए दी जा रही है, कुछ ऎसी चीजों की सूची, जिनमें विटमिन बी-12 पाया जाता है। 8.वेजटेरियन शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उनके पास विटमिन बी-12 हासिल करने के स्त्रोत सीमित संख्या में होते हैं, इसलिए उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन,सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। बी-12 मुख्यत मिट्टी में पाया जाता है। इसलिए यह जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे-आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी आंशिक रूप से पाया जाता है। इसके अलावा 45 मल्टीग्रेन ब्रेड और वे प्रोटीन पाउडर भी इसके अच्छे स्त्रोत हैं। यदि एक किलोग्राम आटे में 100 ग्राम वे प्रोटीन पाउडर मिला दिया जाए तो इससे व्यक्ति को विटमिन बी-12 का पोषण मिल जाता है। 9.नॉनवेज नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फूड से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है, पर इनके ज्यादा सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जो नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए नॉनवेज का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए। हमें रोजाना औसतन 2.4 माइक्रोग्राम विटमिन बी-12 की जरूरत होती है, जो शाकाहारी लोगों को सामान्यत- 3 ग्लास दूध,3 कटोरी दही, 80 ग्राम पनीर के अलावा खाने में 4.4 मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियां, 4.5 मल्टीग्रेन ब्रेड, ओट्स और बिस्किट के सेवन से मिल जाता है। नॉन-वेजटेरियन लोगों को नाश्ते में नियमित रूप से एक उबले अंडे के अलावा लंच और डिनर में चिकेन या फि श के दो पीसेज लेने चाहिए।

Friday, 27 November 2020

कैल्शियम (Calcium)

 हडि्डयों और दांतों को बनाने और उनके रख-रखाव के लिए, पेशियों के सामान्य संकुचन के लिए, हृदय की गति को नियमन करने के लिए और रक्त का थक्का बनाने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम जीवन-शक्ति और सहनशीलता बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल स्तरों को संतुलित करता है, स्नायुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और रजोधर्म विषयक दर्दों के लिए ठीक है। एन्जाइम की गतिविधि के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है। हृदय-संवहनी के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम मैग्नेशियम के साथ काम करता है। रक्त के जमाव के द्वारा यह घावों को शीघ्र भरता है। कुछ विशेष कैंसर के विरुद्ध भी यह सहायक होता है। कैल्शियम उदासी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और एलर्जी को कम करता है।

कैल्शियम की आवश्यकता गर्भवती महिलाओं, 60 से अधिक उम्र के पुरुषों, 45 से अधिक उम्र की स्त्रियों, धूम्रपा करने वालों और अधिक शराब पीने वालों को अधिक होती है। बच्चों में सूखा रोग कैल्शियम की कमी का ही लक्षण है।

विटामिन `डी´ की विशेष रूप से आवश्यकता कैल्शियम के समावेशन के लिए होती है। विटामिन `सी´ भी कैल्शियम के समावेशन में सुधार लाता है। सम्पूरक के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट भोजन के साथ अधिक अच्छे ढंग से समावेशित होता है।

दूध और इसके उत्पाद, दालें, सोयाबीन, हरी पत्तीदार सब्जियां, नींबू जाति के फल, सार्डीन, मटर, फलियां, मूंगफली, वाटनट (सिंघाड़ा), सूर्यमुखी के बीज इस खनिज के महत्वपूर्ण स्रोत हैं

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के...