Friday, 13 August 2021

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के बाद लगेगा वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए हम ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते है

Thursday, 12 August 2021

After school activice

When there are so many activities on offer, and each one looks as good as the next, how do you gauge the worth and effectiveness of these activities? Sure, you want an activity that junior enjoys. But, we really cannot afford to waste time on pleasure for pleasure’s sake, do we? There needs to be a grain of gold somewhere in there. Given below is a list of characteristics that any good after school activity must possess. Clarity in objectives and goals is the first important thing. What does the course offer? How does it propose to achieve the results? How many kids make up a batch? Ask questions. After all, when you are dishing out the dough, you really need to understand what you are getting in return. A good after school activity will provide lots of opportunities for the young to increase their level of understanding of complex concepts. This is true of recreational activities too. Learning to pitch a ball, or dance to a tune – regardless of the activity involved, the child should be encouraged to grapple with and conquer new concepts. This not only keeps boredom at bay by challenging the child, but also builds up his self-confidence. Development of academic, personal and social skills is one of the prime aims of an after school activity. As the skills develop, the child’s self-esteem also increases. After school activities are all about boosting a child’s sense of competence. Good and effective after school activities promotes the resilience of youth and encourages them to grow stronger, be it mentally, emotionally or physically. Safety is one of the first requirements of an after school activity. The staff should be qualified, adequate and alert. Never put your child in a program where safety is a matter of accident instead of a matter of priority. The staff should be friendly and should have a positive relationship with the child. Therefore, the program should have professional and trained staff that loves to interact with children. The program should maintain a cooperative and supportive attitude and a structured environment. Participation and collaboration as opposed to competition and antagonism must be encouraged. Some programs involve the children in planning activities and making decisions. Adults often forget to get the opinion of their children. By giving the children an opportunity to voice their opinion, programs become fun activities that children are motivated to participate in. Young people thrive when they are listened to, respected and allowed to contribute their mite. Routine evaluations are an important part of after school programs. If the child does not benefit from a class, don’t waste time being over-optimistic. Try something new. You are now ready to look for the perfect after school activity for your child. But don’t let us forget that having fun is also an important part of growing up. The child deserves a few hours of pure delight. Remember, all work and no play

Friday, 21 May 2021

भारत में पंचायती राज bharat me panchayte raj,

भारत में पंचायती राज भारत में ब्रिटीश काल 1880 से 1884 के मध्य लार्ड रिपन का कार्यकाल पंचायती राज का स्वर्ण काल माना जाता है। इसने स्थाई निकायों को बढाने का प्रावधान किया। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के भाग -4 में Article 40 में ग्राम पंचायतों के गठन और उन्होंने शक्तियां का उलेख किया गया है लेकिन इसको संवैधनिक दर्जा नहीं मिला। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम,तालुका और जिला आते हैं| भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्वा में रही है | आधुनिक भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 October 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गयी | इस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री ‘मोहनलाल सुखाडिया’ व मुख्या सचिव ‘भगत सिंह मेहता’ थे | भगत सिंह मेहता को राजस्थान में व बलवंतराय मेहता को भारत में पंचायती राज का जनक मन जाता है | इसको सवैधानिक दर्जा 73 वें संविधान सेशोधन 1992 मे मिला इसको ग्याहरवी अनुसूची, भाग -9 व Article 243 में 16 कानून व 29 कार्यो का उलेख किया गया है।भारत में 1957 – बलवन्त राय मेहता समिति की सिफारिश पर त्रिस्तरीय पंचायती राज का गठन किया गया। (1)ग्राम स्तर पर ग्रामपंचायत(2) खण्ड स्तर पर पंचायत समिति और(3) जिला स्तर पर जिला परिषद। भारत का संविधान (73वाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 भारत के संविधान में एक औरसंशोधन किया गया। संविधान के अनुच्छेद 40 में सुरक्षित किए गए राज्यों की नीति निर्देशक सिद्धांतों में से एक में यह कहा गया है कि राज्यों को ग्राम पंचायतों का गठन करने और उन्हें वे सभी अधिकार प्रदान करने के लिए क़दम उठाने चाहिए, जो उन्हें एक स्वायत्तशासी सरकार की इकाइयों के रूप में काम करने के लिए आवश्यक हैं। इसका उद्देश्य अन्य चीजों के अलावा, एक गाँव में अथवा गाँवों के समूह में ग्रामसभा स्थापित करना, गाँव के स्तर पर तथा अन्य स्तरों पर पंचायतों का गठन करना, गाँव और उसके बीच के स्तर पर पंचायतों की सभी सीटों के लिए सीधे चुनाव करना, ऐसे स्तरों पर पंचायतों के यदि सरपंच हैं तो उनका चुनाव कराना, पंचायतों में सदस्यता के लिए और सभी स्तरों पर पंचायत के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण, महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई सीटों का आरक्षण, पंचायतों के लिए पाँच साल की कार्यवधि तय करना और यदि कोई पंचायत भंग हो जाती है तो छह महीने के भीतर उसका चुनाव कराने की व्यवस्था करना है। भारत का संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 भारत के संविधान में एक और संशोधन किया गया। अनेक राज्यों के विभिन्न कारणों से स्थानीय निकाय कमज़ोर और बेअसर हो गए हैं। इनमें नियमित चुनाव न होना, लंबे समय तक भंग रहना और कर्तव्यों तथा अधिकारों का समुचित हस्तांतरण न होना शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप, शहरी स्थानीय निकाय एक स्वायत्तशासी सरकार की जीवंत लोकतांत्रित इकाई के रूप में कारगर ढ़ग से कम नहीं कर पा रहे हैं। इन खामियों को देखते हुए संविधान में पालिकाओं के संबंध में एक नया भाग 9 ए शामिल किया गया है, ताकि अन्य चीजों के अलावा निम्नलिखित प्रावधान किए जा सकें: तीन तरह की पालिकाओं का गठन, जैसे कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए नगर पंचायतों, छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए नगर परिषदें और बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निगम।

Monday, 12 April 2021

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ,प्रधानमंत्रियों की सूची List of Presidents, Vice Presidents, Prime Ministers of India bharat ke pradhan nantry in hindi

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ,प्रधानमंत्रियों की सूची संख्या नाम कार्यकाल 1 ऱाजेन्द्र प्रसाद 1950 से 1962 2 सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1962 से 1967 3 जाकिर हुसैन 1967 से 1969 वी.वी. गिरि (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1969 से 1969 – मोहम्मद हिदायतुल्ला (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1969 से 1969 4 वी.वी. गिरि 1969 से 1974 5 फखरुद्दीन अली अहमद 1974 से 1977 – बसप्पा दानप्पा जट्टी (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1977 से 1977 6 नीलम संजीव रेड्डी 1977 से 1982 7 ज्ञानी जेल सिंह 1982 से 1987 8 आर.वेंकटरमन 1987 से 1992 9 शंकर दयाल शर्मा 1992 से 1997 10 के.आर. नारायणन 1997 से 2002 11 एपीजे अब्दुल कलाम 2002 से 2007 12 प्रतिभा पाटिल 2007 से 2012 13 प्रणव मुखर्जी 2012 से 2017 14 राम नाथ कोविंद 2017 से वर्तमान भारत के उपराष्ट्रपति की सूची संख्या नाम कार्यकाल 1 सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 14 मई 1957 तक 2 जाकिर हुसैन 13 मई 1962 से 12 मई 1967 तक 3 वी वी गिरी 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक 4 गोपाल स्वरूप पाठक 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974 तक 5 बी डी जत्ती 31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979 तक 6 मोहम्मद हिदायतुल्ला 31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984 तक 7 रामस्वामी वेंकटरमण 31 अगस्त 1984 से 27 जुलाई 1987 तक 8 शंकर दयाल शर्मा 3 सितम्बर 1987 से 24 जुलाई 1992 तक 9 के आर नारायणन 21 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997 तक 10 कृष्णकांत 21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002 तक 11 भैरो सिंह शेखावत 19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007 तक 12 हामिद अंसारी 11 अगस्त 2007 से 19 जुलाई 2017 13 वेंकैया नायडू 8 अगस्त 2017 से अब तक

Thursday, 4 February 2021

प्याज के फायदे (विटामिन बी)Benefits of Onion (Vitamin B) in hindi piyaaz khane ke paidey

प्याज के फायदे (विटामिन बी) प्याज के फायदे बहुत होते हैं और यह बहुत ही शानदार घरेलू नुस्खा है। प्याज खाने को स्वादिष्ट बनाने का काम तो करता ही है साथ ही यह एक बेहतरीन औषधि भी है। कई बीमारियों में यह रामबाण दवा के रूप में काम करता है। प्याज का प्रयोग खाने में बहुत किया जाता है। प्या‍ज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। प्याज लू की रामबाण दवा है। आंखों के लिए यह बेहतरीन औषधि है। प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन बी) पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि प्याज आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। प्याज के लाभ – लू लगने पर – गर्मियों के मौसम में प्याज खाने सू लू नहीं लगती है। लू लगने पर प्याज के दो चम्मच रस को पीना चाहिए और सीने पर रस की कुछ बूंदों से मालिश करने पर फायदा होता है। एक छोटा प्याज साथ में रखने पर भी लू नहीं लगती है। बालों के लिए – बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। गिरते हुए बालों के स्थान पर प्याज का रस रगडने से बाल गिरना बंद हो जाएंगे। इसके अलावा बालों का लेप लगाने पर काले बाल उगने शुरू हो जाते हैं। पेशाब बंद होने पर – अगर पेशाब होना बंद हो जाए तो प्याज दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलुवा बना लीजिए। इसको गर्म करके पेट पर इसका लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। पानी में उबालकर पीने से भी पेशाब संबंधित समस्या समाप्त हो जाती है। जुकाम के लिए – प्याज गर्म होती है इसलिए सर्दी के लिए बहुत फायदेमंद होती है। सर्दी या जुकाम होने पर प्याज खाने से फायदा होता है। उम्र के लिए – प्याज खाने से कई शारीरिक बीमारियां नहीं होती हैं। इसके आलावा प्याज कइ बीमारियों को दूर भगाता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्याज खाने से उम्र बढती है, क्योंकि इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और शरीर स्वस्‍थ्‍य रहता है। पथरी के लिए – अगर आपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर प्यास के रास्ते से बाहर निकल जाती है।

Friday, 1 January 2021

Preamble to the Constitution in hindi,,, संविधान की प्रस्तावना

प्रस्तावना संविधान के लिए एक परिचय के रूप में कार्य करती है। 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इसमें संशोधन किया गया था जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था। संविधान की प्रस्तावना का निर्माण भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य करने के लिए किया गया। यह भारत के सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता को सुरक्षित करती है और लोगों के बीच भाई चारे को बढावा देती है। प्रस्तावना उद्देशिका संविधान के आदर्शोँ और उद्देश्योँ व आकांक्षाओं का संछिप्त रुप है। अमेरिका का संविधान प्रथम संविधान है, जिसमेँ उद्देशिका सम्मिलित है। भारत के संविधान की उद्देशिका जवाहरलाल नेहरु द्वारा संविधान सभा मेँ प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है। उद्देश्यिका 42 वेँ संविधान संसोधन (1976) द्वारा संशोधित की गयी। इस संशोधन द्वारा समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द सम्मिलित किए गए। प्रमुख संविधान विशेषज्ञ एन. ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को संविधान का परिचय पत्र कहा है। हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिक को : सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक नयाय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब मेँ व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा मेँ आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत २००६ विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित, और आत्मार्पित करते हैं। प्रस्तावना का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय उपलब्ध कराना। विचार, मत, विश्वास, धर्म तथा उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करना। पद और अवसर की समानता देना। व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता स्थापित करना। आवश्यक तत्व उद्घोषित करती है कि भारत की संप्रभुता भारत के लोगोँ मेँ समाहित है। उद्घोषित करती है कि भारत भारतीय राज्य की प्रकृति संप्रभु, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक है। उद्घोषित करती है कि भारत के लोगोँ का उद्देश्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता प्राप्त करना है तथा बंधुत्व की भावना का विकास करना है। उद्घोषित करती है कि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित, आत्मार्पित किया गया है। परिभाषिक शब्दों के भावार्थ हम भारत के लोग : हम भारत के लोग संपूर्ण भारतीय राजव्यवस्था का मूल आधार है। इन शब्दोँ का महत्व इस अर्थ मेँ है कि अपने संपूर्ण इतिहास मेँ पहली बार भारत के लोग इस स्थिति मेँ हैं कि अपने भाग्य का निर्माण करने का निर्णय स्वयं कर सकें। यह शब्दावली भारतीय समाज के अंतिम व्यक्ति की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है कि हमारे भारत और उसकी व्यवस्था का स्वरुप क्या हो। ध्यान रहे कि इससे पूर्व सभी अधिनियमों को ब्रिटेन ने पारित किया था जबकि यह संविधान भारत की प्रमुख प्रभुत्व संपन्न संविधान सभा ने भारत के लोगोँ की और से अधिनियमित किया था। संप्रभुता : इस शब्द का अर्थ है कि भारत ने अपने आंतरिक और वाह्य मामलोँ मेँ पूर्णतः स्वतंत्र है। अन्य कोई सत्ता इसे अपने आदेश के पालन के लिए विवश नहीँ कर सकती है। भारत मेँ स्वतंत्र होने के बाद से 1949 मेँ राष्ट्रमंडल की सदस्यता स्वेच्छा से की थी। अतः यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन नहीँ है। समाजवादी : यह शब्द एक विशिष्ट आर्थिक व्यवस्था का द्योतक है जिसमेँ राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियोँ पर सरकार के माध्यम से पूरे समाज का अधिकार होने को मान्यता दी जाती है। यह पूंजी तथा व्यक्तिगत पूंजी पर आधारित आर्थिक व्यवस्था, पूंजीवाद के विपरीत संकल्पना है। 42 वेँ संविधान संशोधन द्वारा शामिल किए जाने से पूर्व यह नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से संविधान मेँ शामिल था। समाजवादी शब्द को उद्देशिका मेँ सम्मिलित करना हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के उद्देश्यों के अनुरुप है। पंथनिरपेक्ष : यह शब्द घोषित करता है कि भारत एक राष्ट्र के रुप मेँ किसी धर्म विदेश विशेष को मान्यता नहीँ देता है। इससे यह भी घोषित होता है कि भारत सभी धर्मो का आदर समान रुप से करता है। सभी नागरिक अपने व्यक्तिगत विश्वास, आस्था और धर्म का पालन, संरक्षण और संवर्धन करने के लिए स्वतंत्र है। यह शब्दावली भी 42 वेँ संविधान संशोधन द्वारा उद्देशिका मेँ सम्मिलित की गयी। यद्यपि पंथनिरपेक्षता के मूल तत्व संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 मेँ समाहित हैं। लोकतंत्रात्मक : यह अत्यंत व्यापक अर्थों वाली शब्दावली है जिससे ध्वनित होता है कि आम आदमी की आवाज महत्वपूर्ण है। शासन प्रणाली हो या समाज व्यवस्था सभी क्षेत्रोँ मेँ लोकतंत्र की स्थापना के उद्देश्य का तात्पर्य यह घोषित करता है कि हम सभी समान है तथा क्योंकि हम मनुष्य है इसलिए अपने वर्तमान और भविष्य के उद्देश्यों, नीतियो को तय करना हम सब का समान अधिकार है। उद्देशिका मेँ प्रयुक्त लोकतांत्रिक शब्द भारत को लोकतंत्रात्मक प्रणाली का राष्ट्र घोषित करता है। भारत ने अप्रत्यक्ष लोकतंत्र के अंतर्गत संसदीय प्रणाली को अपने ऐतिहासिक अनुभवो के आधार पर चुना। गणराज्य : शब्द का तात्पर्य है कि राष्ट्र का प्रमुख या अध्यक्ष नियमित अंतराल पर नियमित कार्यकाल के लिए चुना जाता है। ब्रिटेन में वंशानुगत अधार पर राजा या रानी राष्ट्र का प्रतिनिधिनित्व हारते हैं, जबकि शासन की बागडोर प्रधानमंत्री के हाथ मेँ होती है। भारत मेँ गणतंत्र त्वक व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्र और शासन का प्रमुख एक ही पदाधिकारी राष्ट्रपति होता है। सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक नयाय : उद्देशिका भारत के नागरिकोँ को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक नयाय प्राप्त कराने के उद्देश्य की घोषणा करती है। न्याय का सामान्य अर्थ होता है कि भेद-भाव की समाप्ति। राजनीतिक न्याय सहित आर्थिक और सामाजिक नयाय के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए नीति-निदेशक तत्वों (भाग-4), मूल अधिकारोँ (भाग-3) मेँ विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक नयाय का लक्ष्य 1917 की रुसी क्रांति से प्रेरित है।

Wednesday, 9 December 2020

आखो के भागो के कार्य

मानव नेत्र के निम्न कार्य है - 1. नेत्र हमें किसी भी वस्तु को देखने किया क्षमता प्रधान करती है 2. परीतारीका कि सहायता नेत्र मे प्रवेश करने वाले प्रकाश के परी - मान को घटाया या बढ़ाया जा सकता है 3.नेत्र हमारी 25cm तक रखी हुई किसी भी वस्तु को स्पस्ट देख सकता है

Thursday, 3 December 2020

benefits of eating apples in hindi,सेब खाने के फायदे

प्राकृतिक दृष्टि से मीठा सेब गर्म व आर्द्र होता है जबकि खट्टा सेब ठंडा एवं शुष्क होता है परंतु खट्टा मीठा सेब संतुलित और थोड़ा शष्क होता है। सेब के पेड़ का समस्त भाग ठंडा व शुष्क होता है और उसके पत्ते और फल में विष विरोधी शक्ति होती है। कच्चा सेब खाने से कब्ज़ होता है और वह दस्त को ठीक कर देता है। सेब एक प्राकृति दातून है जो दातों की सफाई के अतिरिक्त संक्रमण रोधी होता है और दातों को मज़बूत करता है। सेब का पत्ता मूत्रवर्धक है और उसके पत्ते से बने हुए काढ़े का प्रयोग गुर्दे का वरम एवं उससे जड़ी समस्याओं के उपचार के लिए होता हे सेब खाने से भूख बढ़ती है। सेब खाने से भय और अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायता मिलती है। फंसी हुआ आवाज़ के उपचार के लिए सेब खाते हैं और इसी प्रकार खांसी, बवासीर, स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों और मोटापे की समस्या से ग्रस्त लोगों के उपचार में भी सेब का सेवन बहुत लाभदायक है। सेब में विटामिन ए बी और सी पाइ जाती है जो आंख, चमड़ा, बाल और नाखून की मज़बूती के लिए बहुत लाभदायक है। गुर्दे की पथरी निकालने में सेब का सेवन प्रभावी है। सेब को उसके छिलके के साथ खाना चाहिये क्योंकि जो विटामिन पूरे सेब में होती है उससे गुना अधिक विटामिन केवल उसके छिलके में होती है। पका हुआ सेब खाने से नींद आती है और उससे आराम मिलता है। सेब खाने से बदहज़्मी व अपच की समस्या दूर करने में सहायता मिलती है। ज़ुकाम और काली खांसी के उपचार के लिए सेब के शर्बत का प्रयोग होता है। सेब के सेवन से जोड़ों के दर्द को दूर करने में सहायता मिलती है।

Chromium in hindi क्रोमियमखून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाज,मक्के का तेल, सील मछली,कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया

Wednesday, 2 December 2020

Fundamental Rights in hindi मौलिक अधिकार in hindi

मौलिक अधिकार भाग -3 मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक) (अमेरिका से लिये) मौलिक अधिकारों से तात्पर्य वे अधिकार जो व्यक्तियों के सर्वागिण विकास के लिए आवश्यक होते है इन्हें राज्य या समाज द्वारा प्रदान किया जाता है।तथा इनके संरक्षण कि व्यवस्था की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 10 दिसम्बर 1948 को वैश्विक मानवाधिकारो की घोषणा की गई इसलिए प्रत्येक 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। भारतीय संविधान में 7 मौलिक अधिकारों का वर्णन दिया गया था। समानता का अधिकारा - अनुच्छेद 14 से 18 तक स्वतंन्त्रता का अधिकार - अनुच्छेद 19 से 22 तक शोषण के विरूद्ध अधिकार - अनुच्छेद 23 व 24 धार्मिक स्वतंन्त्रता का अधिकार - अनुच्छेद 25 से 28 तक शिक्षा एवम् संस्कृति का अधिकार - अनुच्छेद 29 और 30 सम्पति का अधिकार - अनुच्छेद 31 सवैधानिक उपचारो का अधिकार - अनुच्छेद 32 अनुच्छेद - 12 राज्य की परिभाषा अनुच्छेद - 13 राज्य मौलिक अधिकारों का न्युन(अतिक्रमण) करने विधियों को नहीं बनाऐंगा। 44 वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा "सम्पति के मौलिक अधिकार" को इस श्रेणी से हटाकर "सामान्य विधिक अधिकार" बनाकर 'अनुच्छेद 300(क)' में जोड़ा गया है। वर्तमान में मौलिक अधिकारों की संख्या 6 है। समानता का अधिकार- अनच्छेद 14 से अनुच्छेद 18 अनुच्छेद - 14 विधी कके समक्ष समानता ब्रिटेन से तथा विधि का समान सरंक्षण अमेरिका से लिया अनुच्छेद - 15 राज्य जाती धर्म लिंग वर्ण, आयु और निवास स्थान के समक्ष भेदभाव नहीं करेगा। राज्य सर्वाजनिक स्थलों पर प्रवेश से पाबन्दियां नहीं लगायेगा। अनुच्छेद 15(3) के अन्तर्गत राज्य महीलाओं और बालकों को विशेष सुविधा उपलब्ध करवा सकता है। अनुच्छेद - 16 लोक नियोजन में अवसर की समानता(सरकारी नौकरीयों में आरक्षण का प्रावधान) अनुच्छेद 16(1) राज्य जाती, धर्म, लिंग वर्ण और आयु और निवास स्थान के आधार पर नौकरी प्रदान करने में भेदभाव नहीं करेगा लेकिन राज्य किसी प्रान्त के निवासियो को छोटी नौकरीयों में कानुन बनाकर संरक्षण प्रदान कर सकता है। अनुच्छेद 16(4) के अन्तर्गत राज्य पिछडे वर्ग के नागरिको को विशेष संरक्षण प्रदान कर सकता है। इसमें भुमिपुत्र का सिद्धान्त दिया गया है। अनुच्छेद - 17 अस्पृश्यता/छुआ छुत का अन्त - भारतीय संसद ने अस्पृश्यता निशेध अधिनियम 1955 बनाकर इसे दण्डनिय अपराध घाषित किया है। अनुच्छेद - 18 उपाधियों का अन्त किया गया है राज्य सैन्य और शैक्षिक क्षेत्र के अलावा उपाधि प्रदान नहीं करेगा(वर्तमान में समाज सेवा केा जोड़ा गया) ।उपाधि ग्रहण करने से पुर्व देश के नागरिक तथा विदेशी व्यक्तियों को राष्ट्रपति की अनुमति लेना आवश्यक है

Tuesday, 1 December 2020

Potassium in hindi , पोटेशियम

पोटेशियम मूल खनिज है। इसके बिना जीवन सम्भव नहीं है। पोटेशियम हमेशा किसी एसिड के साथ पाया जाता है। खनिज की कमी वाली मिट्टी खनिज की कमी वाला आहार उत्पन्न करती है। इस प्रकार के आहार का अंतर्ग्रहण शरीर की कोशिकाओं से पोटेशियम लेने के लिए विवश करता है जिससे सम्पूर्ण शरीर-रसायन विक्षुब्ध हो जाता है। पोटेशियम की कमी विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में सूखा हुआ राख, कोयला या विशिष्ट प्रकार की मिट्टी भी खाने की इच्छा पैदा करता है। पोटेशियम पेशियों, स्नायुओं की सामान्य शक्ति, हृदय की क्रिया और एन्जाइम प्रतिक्रयाओं के लिए आवश्यक है। यह शरीर के तरल संतुलन को नियमित करने में सहायक होता है। इसकी कमी से स्मरण-शक्ति का ह्रास पेशियों की कमजोरी, अनियमित हृदय-गति और चिड़चिड़ापन जैसे रोग हो सकते हैं। इसकी अधिकता से हृदय की अनियमितताएं हो सकती हैं। पोटेशियम कोमल ऊतकों के लिये वही है जो कैल्शियम शरीर के कठोर ऊतकों के लिए है। यह कोशिकाओं के भीतर और बाहर के तरलों का विद्युत-अपघटनी संतुलन बनाये रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आयु के साथ पोटेशियम का अर्न्तग्रहण भी बढ़ना आवश्यक है। पोटेशियम की कमी मानसिक सतर्कता के अभाव, पेशियों की थकावट, विश्राम करने में कठिनाई, सर्दी-जुकाम, कब्ज, जी मिचलाना, त्वचा की खुजली और शरीर की मांस-पेशियों में ऐंठन के रूप में प्रतिबिम्बित होती है। सोडियम का बढ़ा हुआ अर्न्तग्रहण शरीर की कोशिकाओं में से पोटेशियम की हानि को बढ़ा देता है। अधिक पोटेशियम से रक्त-नलिकाओं की दीवारें कैल्शियम निक्षेप से मुक्त रखी जा सकती है। विकसित देशों में सेब के आसव का सिरका पोटेशियम का एक उत्तम स्रोत है एक चम्मच सेब के आसव के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाइए और इसकी धीरे-धीरे चुस्की लीजिए। यह शरीर की वसाओं को जलाने में मदद करता है। गायों पर किये गये प्रयोगों में सेब के आसव के सिरके से गायों में गठिया समाप्त हो गया और दूध का उत्पादन बढ़ गया। पोटेशियम के महत्वपूर्ण स्रोत- सूखा हुआ बिना मलाई के दूध का पाउडर, गेहूं के अंकुर, छुहारे, खमीर, आलू, मूंगफली, बन्दगोभी, मटर, केले, सूखे मेवे, नारंगी और अन्य फलों के रस, खरबूजे के बीज, मुर्गे, मछली और सबसे अधिक पैपरिका और सेब के आसव का सिरका।

Sunday, 29 November 2020

Manganese in hindi मैगनीज,

मैगनीज शरीर के सुरक्षा-तंत्रों से सीधे सम्बद्ध है। यह विधि एंजाइमों को सक्रिय करता है और विटामिन `बी´ तथा `ई´ के उचित उपयोग में सहायता देता है। यह पाचन में मदद करता है। मैगनीज मधुमेह के लिए अच्छा है क्योंकि यह ग्लूकोज सहन शक्ति बढ़ाता है। आमतौर से मैगनीज की कमी मानवों में नहीं पाई जाती। इसकी अधिक मात्रा शरीर की लोहा सोखने की क्षमता कम कर देती है। मैगनीज के स्रोत- एक कप काली चाय, गिरीदार फल, बीज, सम्पूर्ण अनाज, चोकर, मछली और मांस।

Chromium in hindi क्रोमियम,

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाजी, मक्के का तेल, सील मछली, कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया जाता है।

जस्ता, Zinc in hindi

जस्ता शरीर में कई एंजाइमों के लिए सह-घटक के रूप में कई कार्य करता है। यह ऊतकों के सामान्य कार्य में सहायता करता है और शरीर में प्रोटीन और कार्बोज को सम्भालने के लिए आवश्यक है। शरीर में जस्ते की कमी मद्यपान, आहार की प्रतिक्रिया, कम प्रोटीन के आहार, जुकाम, गर्भावस्था और रोग के कारण हो सकती है। जस्ते की कमी होने से स्वाद और भूख की कमी, घाव का देर से भरना, गंजापन, विकास रुकना, हृदय-रोग, मानसिक रोग और प्रजनन-सम्बंधी विकार हो जाते हैं। कुछ मध्य-पूर्व के देशों में बौनेपन का कारण आहार में जस्ते की कमी माना जाता है। जस्ते के स्रोत- सभी अनाज, मलाई निकाला हुआ दूध, संसाधित पनीर, खमीर, गिरीदार फल, बीज, गेहूं के अंकुर, चोकर, बिना पॉलिश किया हुआ चावल, पालक, मटर, कॉटेज पनीर, समुद्र से प्राप्त होने वाला आहार, मुर्गे-अण्डे। सम्पूर्ण गेहूं के आटे के उत्पादों में सफेद आटे की अपेक्षा चार गुना अधिक जस्ता होता है।

Copper in hindi कॉपर, Copper

कॉपर कई एन्जाइमों में पाया जाता है। विष का प्रभाव कम करने और संक्रामक रोगों में इसका सेवन किया जाता है। कॉपर लेने से लौह, विटामिन-सी तथा जिंक को पचाने में मदद मिलती है। लाल रक्त कणिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) कॉपर के बिना नहीं बन सकती। शरीर में इसकी कमी से व्यक्ति `एनीमिक´ (खून की कमी से ग्रस्त) हो सकता है। जैतून और गिरीदार फल में यह पाया जाता है। इसे दो मिलीग्राम से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। हमारे शरीर को दूसरे माध्यमों से कॉपर मिलता रहता है जैसे तांबे के बर्तनों, पानी के पाइपों, दवाओं खाद्य-प्रसंस्करणों (फूड प्रोसेसिंग), सुंगंधों और फसलों पर छिड़की जानेवाली दवाओं आदि से

एल्यूमीनियम, Aluminum in hindi

एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग एल्यूमीनियम मस्तिष्क के अन्दर गहराई में कुछ स्नायु-रेशों तक अपना मार्ग बनाते हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है। हुए मानसिक रोग उत्पन्न करता है। शरीर में यह धातु सस्ते संक्षरित करने वाले एल्यूमीनियम के बर्तनों से आती है या एल्यूमीनियम की पन्नी से प्राप्त होती है।

Saturday, 28 November 2020

विटामिन ए के लाभ , Benefits of vitamin a in hindi

विटामिन शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप में चलाने में मदद करता है। विटामिन ए की खुराक न लेने से सर्दी-जुकाम, नाक-कान के रोग, सांस संबंधी समस्याएं,दांतों का कमजोर होना, त्वचा का शुष्की होना, चर्मरोग, पथरी होना, कब्ज होना इत्यादि समस्याएं होती है। विटामिन ए की कमी से शरीर नुकसान पहुंचता है। विटामिन ए का कार्य स्किन, बाल, नाखून, ग्रंथि, दांत, मसूड़े और हड्डी आदि को सामान्य रूप से बनाये रखना है। बच्चों में खासकर विटामिन ए की आपूर्ति करना आवश्यक है। आइए जानें विटामिन ए के लाभों के बारे में। विटामिन ए की कमी के कारण आंखों को कम दिखाई देने लगता है, आंखों में पानी आता रहता है। विटामिन ए की कमी से बाल झड़ने लगते हैं। सिर के बाल खुरदरे हो जाते हैं और एलर्जी भी हो सकती है। विटामिन ए की कमी से भूख भी कम लगती है। विटामिन ए की कमी से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है और बच्चों के कद पर भी असर पड़ सकता है। स्किन और बालों में रूखापन आ सकता है। इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। विटामिन ए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर के विभिन्ने रोगों से लड़ने के काबिल बनाता है। विटामिन ए से फेफड़े व सांस की नली के रोग दूर रहते हैं , हड्डियां मजबूत बनाती हैं, कील-मुंहासे दूर होते हैं और चेहरे पर निखार आता है ,इससे दाद, खाज- खुजली जैसी समस्याओं से भी निजात मिलती है, शरीर की सूजन भी दूर होती है। विटामिन ए की कमी से शाम व रात को कम दिखाई देता है, इस समस्या को रतौंधी कहते हैं शरीर का वजन कम हो जाता है जननेद्रियां कमजोर पड़ जाती है। टमाटर, गाजर, पपीता, हरी धनिया, पत्ता गोभी, अंडा, दूध, मक्खन, घी, मेथी, पालक, पुदीना, ककड़ी, चुकुंदर, सरसो के साग, नाशपाती और मछली इत्यादि में भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है।

शरीर के लिए जरूरी विटामिन,Body essential vitamins (vitamin B) in hindi

.विटमिन बी-12 के फायदे- विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने में सहायता करता है। ये ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न?व्र्स के कुछ तत्वों की रचना करता है। लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। ये शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है। यह ऎसा विटमिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। वहां लैक्टो बैसिलस मौजूद होते हैंए जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। फि र यह लिवर में जाकर स्टोर होता है। उसके बाद शरीर के जिन हिस्सों को इसकी जरूरत होती है, लिवर इसे वहां भेजने का काम करता जाता है। 2.विटमिन बी-12 की कमी होने के नुकसान- विटमिन बी.12 की कमी होने से हाथ.पैरों में झनझनाहट और जलन होती है। व्यवहार में अस्थिरताए अनावश्यक थकानए डिप्रेशन और याद्दाश्त में कमी हो सकती है। विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाने पर इससे स्पाइनल कॉर्ड के न?व्र्स नष्ट होने लगते हैंण् ऎसी स्थिति में पैरालिसिस तक हो सकता ह। 3.खानपान का रखें ध्यान रखें- शाकाहारी लोगों को दूध, दही, मक्खन, सोया मिल्क और पनीर का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। विटमिन बी-12 की कमी को दूर करने के लिए नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फू ड खाना चाहिए। अपनी ओर से हम हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की कोशिश करते हैं। फि र भी आज की अति व्यस्त जीवनशैली की वजह से हमारे खान-पान में कोई न कोई ऎसी कमी रह ही जाती है, जिससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हमें परेशान करने लगती हैं। वैसे तो सभी विटमिंस और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी होते हैं।विटमिन बी-12 एक ऎसा तत्व है, जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। 4.क्या है कमी की वजह - इसका सबसे बड़ा कारण है आनुवंशिकता। यदि आंतों की कोई भी सर्जरी हुई हो तो इससे विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है। क्रोंज्स नामक आंतों की बीमारीए जिसकी वजह से आंतें विटमिन बी-12 का अवशोषण नहीं कर पातीं। अगर व्यक्ति को लंबे समय तक एनीमिया की समस्या रही हो तो उसमें भी विटामिन में बी-12 की कमी पाई जा सकती है। इसकी कमी से होने वाली समस्या को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है। अगर डायबिटीज की दवा मेटफ ॉर्मिन का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो भी आंतों में मौजूद विटमिन बी-12 नष्ट हो जाता है। शाकाहरी लोगों में इस समस्या की आशंका अधिक रहती है क्योंकि यह विटामिन मुख्यत एनिमल प्रोडक्ट्स में ही पाया जाता है। एशियाई देशों में खास तौर पर भारत में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि यहां की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा शाकाहारी है। 5.इसकी कमी को पहचानें कैसे अगर शरीर में विटमिन बी-12 की कमी हो तो प्रायरू ऎसे लक्षण देखने को मिलते हैं। हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन होना इसकी कमी को दर्शाता है। याद्दाश्त में कमी आने लगती है। व्यवहार में अस्थिरता आने लगती है। अनावश्यक थकान आने लगती है। डिप्रेशन आने लगता है। अगर शरीर में विटामिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कॉर्ड के नव्र्स नष्ट होने लगते हैं। ऎसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस तक हो सकता है। विटमिन बी-12 शरीर के हर हिस्से के नव्र्स को प्रोटीन देने का काम करता है। 6.उपचार एवं बचाव अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए सीरम विटमिन बी-12 की जांच करवानी चाहिए। अकसर लोग इसके लक्षणों को मामूली थकान या एनीमिया समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। पर ऎसा करना उचित नहीं है क्योंकि आगे चलकर यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है। शाकाहारी लोगों को अपने खानपान के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी मात्रा 400.500 पिकोग्राम मिली लीटर होनी चाहिए। अगर शरीर में इसकी मात्रा इससे कम हो जाए तो व्यक्ति को मिथाइल कोबालामिन नामक टैबलेट या इंजेक्शन दिया जाता है। दवा की मात्रा मर्ज की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। यह दवा आंतों में मौजूद लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया को सçRय करने का काम करती हैं। अगर सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए तो दवाओं और स्वस्थ खानपान से इस समस्या का समाधान हो जाता है। 7.खानपान में विटमिन बी-12 अकसर यह सवाल उठता है कि हमें अपने खानपान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर में विटमिन बी-12 की कमी न हो। यहां वेजटेरियन और नॉन वेजटेरियन लोगों के लिए दी जा रही है, कुछ ऎसी चीजों की सूची, जिनमें विटमिन बी-12 पाया जाता है। 8.वेजटेरियन शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उनके पास विटमिन बी-12 हासिल करने के स्त्रोत सीमित संख्या में होते हैं, इसलिए उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन,सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। बी-12 मुख्यत मिट्टी में पाया जाता है। इसलिए यह जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे-आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी आंशिक रूप से पाया जाता है। इसके अलावा 45 मल्टीग्रेन ब्रेड और वे प्रोटीन पाउडर भी इसके अच्छे स्त्रोत हैं। यदि एक किलोग्राम आटे में 100 ग्राम वे प्रोटीन पाउडर मिला दिया जाए तो इससे व्यक्ति को विटमिन बी-12 का पोषण मिल जाता है। 9.नॉनवेज नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फूड से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है, पर इनके ज्यादा सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जो नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए नॉनवेज का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए। हमें रोजाना औसतन 2.4 माइक्रोग्राम विटमिन बी-12 की जरूरत होती है, जो शाकाहारी लोगों को सामान्यत- 3 ग्लास दूध,3 कटोरी दही, 80 ग्राम पनीर के अलावा खाने में 4.4 मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियां, 4.5 मल्टीग्रेन ब्रेड, ओट्स और बिस्किट के सेवन से मिल जाता है। नॉन-वेजटेरियन लोगों को नाश्ते में नियमित रूप से एक उबले अंडे के अलावा लंच और डिनर में चिकेन या फि श के दो पीसेज लेने चाहिए।

Friday, 27 November 2020

कैल्शियम (Calcium)

 हडि्डयों और दांतों को बनाने और उनके रख-रखाव के लिए, पेशियों के सामान्य संकुचन के लिए, हृदय की गति को नियमन करने के लिए और रक्त का थक्का बनाने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम जीवन-शक्ति और सहनशीलता बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल स्तरों को संतुलित करता है, स्नायुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और रजोधर्म विषयक दर्दों के लिए ठीक है। एन्जाइम की गतिविधि के लिए कैल्शियम की आवश्यकता है। हृदय-संवहनी के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम मैग्नेशियम के साथ काम करता है। रक्त के जमाव के द्वारा यह घावों को शीघ्र भरता है। कुछ विशेष कैंसर के विरुद्ध भी यह सहायक होता है। कैल्शियम उदासी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और एलर्जी को कम करता है।

कैल्शियम की आवश्यकता गर्भवती महिलाओं, 60 से अधिक उम्र के पुरुषों, 45 से अधिक उम्र की स्त्रियों, धूम्रपा करने वालों और अधिक शराब पीने वालों को अधिक होती है। बच्चों में सूखा रोग कैल्शियम की कमी का ही लक्षण है।

विटामिन `डी´ की विशेष रूप से आवश्यकता कैल्शियम के समावेशन के लिए होती है। विटामिन `सी´ भी कैल्शियम के समावेशन में सुधार लाता है। सम्पूरक के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट भोजन के साथ अधिक अच्छे ढंग से समावेशित होता है।

दूध और इसके उत्पाद, दालें, सोयाबीन, हरी पत्तीदार सब्जियां, नींबू जाति के फल, सार्डीन, मटर, फलियां, मूंगफली, वाटनट (सिंघाड़ा), सूर्यमुखी के बीज इस खनिज के महत्वपूर्ण स्रोत हैं

सोडियम का परिचय (Introduction to sodium)

 सोडियम शरीर की कोशिकाओं के अन्दर और बाहर पानी के संतुलन को बनाये रखने में सहायक होता है। इसकी कमी से पेशियों में ऐंठन, एडेमा हो सकता है, किंतु इसकी अधिकता से हानिकारक परिणाम जैसे उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारियां, जिगर का सूत्रणरोग और संकुलन सम्बंधी हृदय रोग हो सकते हैं। सोडियम मूत्र और विशेषत: पसीने में सोडियम क्लोराइड के रूप में निकलता है। कभी-कभी आहारों में जैव सोडियम आवश्यकता की पूर्ति के लिये पर्याप्त नहीं होता। अत: सोडियम क्लोराइड या खाने का नमक भोजन में शामिल करना पड़ता है।

सोडियम के मुख्य स्रोत हैं- संसाधित आहार, मांस और स्वयं सामान्य नमक। सोडियम की कमी से डरने की आवश्यकता नहीं है।

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के...