Friday, 21 May 2021

भारत में पंचायती राज bharat me panchayte raj,

भारत में पंचायती राज भारत में ब्रिटीश काल 1880 से 1884 के मध्य लार्ड रिपन का कार्यकाल पंचायती राज का स्वर्ण काल माना जाता है। इसने स्थाई निकायों को बढाने का प्रावधान किया। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के भाग -4 में Article 40 में ग्राम पंचायतों के गठन और उन्होंने शक्तियां का उलेख किया गया है लेकिन इसको संवैधनिक दर्जा नहीं मिला। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम,तालुका और जिला आते हैं| भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्वा में रही है | आधुनिक भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 October 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गयी | इस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री ‘मोहनलाल सुखाडिया’ व मुख्या सचिव ‘भगत सिंह मेहता’ थे | भगत सिंह मेहता को राजस्थान में व बलवंतराय मेहता को भारत में पंचायती राज का जनक मन जाता है | इसको सवैधानिक दर्जा 73 वें संविधान सेशोधन 1992 मे मिला इसको ग्याहरवी अनुसूची, भाग -9 व Article 243 में 16 कानून व 29 कार्यो का उलेख किया गया है।भारत में 1957 – बलवन्त राय मेहता समिति की सिफारिश पर त्रिस्तरीय पंचायती राज का गठन किया गया। (1)ग्राम स्तर पर ग्रामपंचायत(2) खण्ड स्तर पर पंचायत समिति और(3) जिला स्तर पर जिला परिषद। भारत का संविधान (73वाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 भारत के संविधान में एक औरसंशोधन किया गया। संविधान के अनुच्छेद 40 में सुरक्षित किए गए राज्यों की नीति निर्देशक सिद्धांतों में से एक में यह कहा गया है कि राज्यों को ग्राम पंचायतों का गठन करने और उन्हें वे सभी अधिकार प्रदान करने के लिए क़दम उठाने चाहिए, जो उन्हें एक स्वायत्तशासी सरकार की इकाइयों के रूप में काम करने के लिए आवश्यक हैं। इसका उद्देश्य अन्य चीजों के अलावा, एक गाँव में अथवा गाँवों के समूह में ग्रामसभा स्थापित करना, गाँव के स्तर पर तथा अन्य स्तरों पर पंचायतों का गठन करना, गाँव और उसके बीच के स्तर पर पंचायतों की सभी सीटों के लिए सीधे चुनाव करना, ऐसे स्तरों पर पंचायतों के यदि सरपंच हैं तो उनका चुनाव कराना, पंचायतों में सदस्यता के लिए और सभी स्तरों पर पंचायत के पदाधिकारियों के चुनाव के लिए जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण, महिलाओं के लिए कम-से-कम एक-तिहाई सीटों का आरक्षण, पंचायतों के लिए पाँच साल की कार्यवधि तय करना और यदि कोई पंचायत भंग हो जाती है तो छह महीने के भीतर उसका चुनाव कराने की व्यवस्था करना है। भारत का संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 भारत के संविधान में एक और संशोधन किया गया। अनेक राज्यों के विभिन्न कारणों से स्थानीय निकाय कमज़ोर और बेअसर हो गए हैं। इनमें नियमित चुनाव न होना, लंबे समय तक भंग रहना और कर्तव्यों तथा अधिकारों का समुचित हस्तांतरण न होना शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप, शहरी स्थानीय निकाय एक स्वायत्तशासी सरकार की जीवंत लोकतांत्रित इकाई के रूप में कारगर ढ़ग से कम नहीं कर पा रहे हैं। इन खामियों को देखते हुए संविधान में पालिकाओं के संबंध में एक नया भाग 9 ए शामिल किया गया है, ताकि अन्य चीजों के अलावा निम्नलिखित प्रावधान किए जा सकें: तीन तरह की पालिकाओं का गठन, जैसे कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए नगर पंचायतों, छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए नगर परिषदें और बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निगम।

Monday, 12 April 2021

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ,प्रधानमंत्रियों की सूची List of Presidents, Vice Presidents, Prime Ministers of India bharat ke pradhan nantry in hindi

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति ,प्रधानमंत्रियों की सूची संख्या नाम कार्यकाल 1 ऱाजेन्द्र प्रसाद 1950 से 1962 2 सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1962 से 1967 3 जाकिर हुसैन 1967 से 1969 वी.वी. गिरि (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1969 से 1969 – मोहम्मद हिदायतुल्ला (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1969 से 1969 4 वी.वी. गिरि 1969 से 1974 5 फखरुद्दीन अली अहमद 1974 से 1977 – बसप्पा दानप्पा जट्टी (कार्यवाहक अध्यक्ष) 1977 से 1977 6 नीलम संजीव रेड्डी 1977 से 1982 7 ज्ञानी जेल सिंह 1982 से 1987 8 आर.वेंकटरमन 1987 से 1992 9 शंकर दयाल शर्मा 1992 से 1997 10 के.आर. नारायणन 1997 से 2002 11 एपीजे अब्दुल कलाम 2002 से 2007 12 प्रतिभा पाटिल 2007 से 2012 13 प्रणव मुखर्जी 2012 से 2017 14 राम नाथ कोविंद 2017 से वर्तमान भारत के उपराष्ट्रपति की सूची संख्या नाम कार्यकाल 1 सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 14 मई 1957 तक 2 जाकिर हुसैन 13 मई 1962 से 12 मई 1967 तक 3 वी वी गिरी 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक 4 गोपाल स्वरूप पाठक 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974 तक 5 बी डी जत्ती 31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979 तक 6 मोहम्मद हिदायतुल्ला 31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984 तक 7 रामस्वामी वेंकटरमण 31 अगस्त 1984 से 27 जुलाई 1987 तक 8 शंकर दयाल शर्मा 3 सितम्बर 1987 से 24 जुलाई 1992 तक 9 के आर नारायणन 21 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997 तक 10 कृष्णकांत 21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002 तक 11 भैरो सिंह शेखावत 19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007 तक 12 हामिद अंसारी 11 अगस्त 2007 से 19 जुलाई 2017 13 वेंकैया नायडू 8 अगस्त 2017 से अब तक

Thursday, 4 February 2021

प्याज के फायदे (विटामिन बी)Benefits of Onion (Vitamin B) in hindi piyaaz khane ke paidey

प्याज के फायदे (विटामिन बी) प्याज के फायदे बहुत होते हैं और यह बहुत ही शानदार घरेलू नुस्खा है। प्याज खाने को स्वादिष्ट बनाने का काम तो करता ही है साथ ही यह एक बेहतरीन औषधि भी है। कई बीमारियों में यह रामबाण दवा के रूप में काम करता है। प्याज का प्रयोग खाने में बहुत किया जाता है। प्या‍ज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। प्याज लू की रामबाण दवा है। आंखों के लिए यह बेहतरीन औषधि है। प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन बी) पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि प्याज आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। प्याज के लाभ – लू लगने पर – गर्मियों के मौसम में प्याज खाने सू लू नहीं लगती है। लू लगने पर प्याज के दो चम्मच रस को पीना चाहिए और सीने पर रस की कुछ बूंदों से मालिश करने पर फायदा होता है। एक छोटा प्याज साथ में रखने पर भी लू नहीं लगती है। बालों के लिए – बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। गिरते हुए बालों के स्थान पर प्याज का रस रगडने से बाल गिरना बंद हो जाएंगे। इसके अलावा बालों का लेप लगाने पर काले बाल उगने शुरू हो जाते हैं। पेशाब बंद होने पर – अगर पेशाब होना बंद हो जाए तो प्याज दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलुवा बना लीजिए। इसको गर्म करके पेट पर इसका लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। पानी में उबालकर पीने से भी पेशाब संबंधित समस्या समाप्त हो जाती है। जुकाम के लिए – प्याज गर्म होती है इसलिए सर्दी के लिए बहुत फायदेमंद होती है। सर्दी या जुकाम होने पर प्याज खाने से फायदा होता है। उम्र के लिए – प्याज खाने से कई शारीरिक बीमारियां नहीं होती हैं। इसके आलावा प्याज कइ बीमारियों को दूर भगाता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्याज खाने से उम्र बढती है, क्योंकि इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और शरीर स्वस्‍थ्‍य रहता है। पथरी के लिए – अगर आपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर प्यास के रास्ते से बाहर निकल जाती है।

Friday, 1 January 2021

Preamble to the Constitution in hindi,,, संविधान की प्रस्तावना

प्रस्तावना संविधान के लिए एक परिचय के रूप में कार्य करती है। 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इसमें संशोधन किया गया था जिसमें तीन नए शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता को जोड़ा गया था। संविधान की प्रस्तावना का निर्माण भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य करने के लिए किया गया। यह भारत के सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता को सुरक्षित करती है और लोगों के बीच भाई चारे को बढावा देती है। प्रस्तावना उद्देशिका संविधान के आदर्शोँ और उद्देश्योँ व आकांक्षाओं का संछिप्त रुप है। अमेरिका का संविधान प्रथम संविधान है, जिसमेँ उद्देशिका सम्मिलित है। भारत के संविधान की उद्देशिका जवाहरलाल नेहरु द्वारा संविधान सभा मेँ प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है। उद्देश्यिका 42 वेँ संविधान संसोधन (1976) द्वारा संशोधित की गयी। इस संशोधन द्वारा समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द सम्मिलित किए गए। प्रमुख संविधान विशेषज्ञ एन. ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को संविधान का परिचय पत्र कहा है। हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिक को : सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक नयाय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब मेँ व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा मेँ आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत २००६ विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित, और आत्मार्पित करते हैं। प्रस्तावना का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय उपलब्ध कराना। विचार, मत, विश्वास, धर्म तथा उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करना। पद और अवसर की समानता देना। व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता स्थापित करना। आवश्यक तत्व उद्घोषित करती है कि भारत की संप्रभुता भारत के लोगोँ मेँ समाहित है। उद्घोषित करती है कि भारत भारतीय राज्य की प्रकृति संप्रभु, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक है। उद्घोषित करती है कि भारत के लोगोँ का उद्देश्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता प्राप्त करना है तथा बंधुत्व की भावना का विकास करना है। उद्घोषित करती है कि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित, आत्मार्पित किया गया है। परिभाषिक शब्दों के भावार्थ हम भारत के लोग : हम भारत के लोग संपूर्ण भारतीय राजव्यवस्था का मूल आधार है। इन शब्दोँ का महत्व इस अर्थ मेँ है कि अपने संपूर्ण इतिहास मेँ पहली बार भारत के लोग इस स्थिति मेँ हैं कि अपने भाग्य का निर्माण करने का निर्णय स्वयं कर सकें। यह शब्दावली भारतीय समाज के अंतिम व्यक्ति की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है कि हमारे भारत और उसकी व्यवस्था का स्वरुप क्या हो। ध्यान रहे कि इससे पूर्व सभी अधिनियमों को ब्रिटेन ने पारित किया था जबकि यह संविधान भारत की प्रमुख प्रभुत्व संपन्न संविधान सभा ने भारत के लोगोँ की और से अधिनियमित किया था। संप्रभुता : इस शब्द का अर्थ है कि भारत ने अपने आंतरिक और वाह्य मामलोँ मेँ पूर्णतः स्वतंत्र है। अन्य कोई सत्ता इसे अपने आदेश के पालन के लिए विवश नहीँ कर सकती है। भारत मेँ स्वतंत्र होने के बाद से 1949 मेँ राष्ट्रमंडल की सदस्यता स्वेच्छा से की थी। अतः यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन नहीँ है। समाजवादी : यह शब्द एक विशिष्ट आर्थिक व्यवस्था का द्योतक है जिसमेँ राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियोँ पर सरकार के माध्यम से पूरे समाज का अधिकार होने को मान्यता दी जाती है। यह पूंजी तथा व्यक्तिगत पूंजी पर आधारित आर्थिक व्यवस्था, पूंजीवाद के विपरीत संकल्पना है। 42 वेँ संविधान संशोधन द्वारा शामिल किए जाने से पूर्व यह नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से संविधान मेँ शामिल था। समाजवादी शब्द को उद्देशिका मेँ सम्मिलित करना हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के उद्देश्यों के अनुरुप है। पंथनिरपेक्ष : यह शब्द घोषित करता है कि भारत एक राष्ट्र के रुप मेँ किसी धर्म विदेश विशेष को मान्यता नहीँ देता है। इससे यह भी घोषित होता है कि भारत सभी धर्मो का आदर समान रुप से करता है। सभी नागरिक अपने व्यक्तिगत विश्वास, आस्था और धर्म का पालन, संरक्षण और संवर्धन करने के लिए स्वतंत्र है। यह शब्दावली भी 42 वेँ संविधान संशोधन द्वारा उद्देशिका मेँ सम्मिलित की गयी। यद्यपि पंथनिरपेक्षता के मूल तत्व संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 मेँ समाहित हैं। लोकतंत्रात्मक : यह अत्यंत व्यापक अर्थों वाली शब्दावली है जिससे ध्वनित होता है कि आम आदमी की आवाज महत्वपूर्ण है। शासन प्रणाली हो या समाज व्यवस्था सभी क्षेत्रोँ मेँ लोकतंत्र की स्थापना के उद्देश्य का तात्पर्य यह घोषित करता है कि हम सभी समान है तथा क्योंकि हम मनुष्य है इसलिए अपने वर्तमान और भविष्य के उद्देश्यों, नीतियो को तय करना हम सब का समान अधिकार है। उद्देशिका मेँ प्रयुक्त लोकतांत्रिक शब्द भारत को लोकतंत्रात्मक प्रणाली का राष्ट्र घोषित करता है। भारत ने अप्रत्यक्ष लोकतंत्र के अंतर्गत संसदीय प्रणाली को अपने ऐतिहासिक अनुभवो के आधार पर चुना। गणराज्य : शब्द का तात्पर्य है कि राष्ट्र का प्रमुख या अध्यक्ष नियमित अंतराल पर नियमित कार्यकाल के लिए चुना जाता है। ब्रिटेन में वंशानुगत अधार पर राजा या रानी राष्ट्र का प्रतिनिधिनित्व हारते हैं, जबकि शासन की बागडोर प्रधानमंत्री के हाथ मेँ होती है। भारत मेँ गणतंत्र त्वक व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्र और शासन का प्रमुख एक ही पदाधिकारी राष्ट्रपति होता है। सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक नयाय : उद्देशिका भारत के नागरिकोँ को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक नयाय प्राप्त कराने के उद्देश्य की घोषणा करती है। न्याय का सामान्य अर्थ होता है कि भेद-भाव की समाप्ति। राजनीतिक न्याय सहित आर्थिक और सामाजिक नयाय के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए नीति-निदेशक तत्वों (भाग-4), मूल अधिकारोँ (भाग-3) मेँ विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक नयाय का लक्ष्य 1917 की रुसी क्रांति से प्रेरित है।

Wednesday, 9 December 2020

आखो के भागो के कार्य

मानव नेत्र के निम्न कार्य है - 1. नेत्र हमें किसी भी वस्तु को देखने किया क्षमता प्रधान करती है 2. परीतारीका कि सहायता नेत्र मे प्रवेश करने वाले प्रकाश के परी - मान को घटाया या बढ़ाया जा सकता है 3.नेत्र हमारी 25cm तक रखी हुई किसी भी वस्तु को स्पस्ट देख सकता है

Thursday, 3 December 2020

benefits of eating apples in hindi,सेब खाने के फायदे

प्राकृतिक दृष्टि से मीठा सेब गर्म व आर्द्र होता है जबकि खट्टा सेब ठंडा एवं शुष्क होता है परंतु खट्टा मीठा सेब संतुलित और थोड़ा शष्क होता है। सेब के पेड़ का समस्त भाग ठंडा व शुष्क होता है और उसके पत्ते और फल में विष विरोधी शक्ति होती है। कच्चा सेब खाने से कब्ज़ होता है और वह दस्त को ठीक कर देता है। सेब एक प्राकृति दातून है जो दातों की सफाई के अतिरिक्त संक्रमण रोधी होता है और दातों को मज़बूत करता है। सेब का पत्ता मूत्रवर्धक है और उसके पत्ते से बने हुए काढ़े का प्रयोग गुर्दे का वरम एवं उससे जड़ी समस्याओं के उपचार के लिए होता हे सेब खाने से भूख बढ़ती है। सेब खाने से भय और अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायता मिलती है। फंसी हुआ आवाज़ के उपचार के लिए सेब खाते हैं और इसी प्रकार खांसी, बवासीर, स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों और मोटापे की समस्या से ग्रस्त लोगों के उपचार में भी सेब का सेवन बहुत लाभदायक है। सेब में विटामिन ए बी और सी पाइ जाती है जो आंख, चमड़ा, बाल और नाखून की मज़बूती के लिए बहुत लाभदायक है। गुर्दे की पथरी निकालने में सेब का सेवन प्रभावी है। सेब को उसके छिलके के साथ खाना चाहिये क्योंकि जो विटामिन पूरे सेब में होती है उससे गुना अधिक विटामिन केवल उसके छिलके में होती है। पका हुआ सेब खाने से नींद आती है और उससे आराम मिलता है। सेब खाने से बदहज़्मी व अपच की समस्या दूर करने में सहायता मिलती है। ज़ुकाम और काली खांसी के उपचार के लिए सेब के शर्बत का प्रयोग होता है। सेब के सेवन से जोड़ों के दर्द को दूर करने में सहायता मिलती है।

Chromium in hindi क्रोमियमखून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है

क्रोमियम खून में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही खून में वसा की मात्रा को भी सामान्य रखता है। इसे प्रतिदिन 50 से 200 माइक्रोग्राम तक ही लें। मधुमेह और मिर्गी के रोगियों को क्रोमियम लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। क्रोमियम के स्रोत- यह फल, दूध, अनाज,मक्के का तेल, सील मछली,कालीमिर्च, आलू के छिलकों में पाया

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं?

क्या हम COVID 19 का vaccine kisi bhi राज में लगवा सकते हैं? हम वैक्सीन किसी भी राज्य मे लगवा सकते है वैक्सीन का दूसरा टीका लगभग 84 दिनों के...